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दिव्य एवं आलौकिक शक्ति केंद्र ओम शांति भवन रानीपरतेवा में स्नेह मिलन समारोह सम्पन्न..

गरियाबंद / छुरा। विगत दिनों दिव्य एवं अलौकिक शक्ति केंद्र, ओम शांति भवन रानीपरतेवा में पुराने वर्ष की विदाई, एवं नववर्ष के आगमन अवसर पर स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया गया।

स्नेह मिलन समारोह अंतर्गत अतिथियों का स्वागत अभिनंदन, उद्बोधन -संबोधन, सत्संग, सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतिकरण आदि गतिविधियां सम्पन्न की गई।

समारोह में नासिक (महाराष्ट्र) बिलासपुर (छ.ग.) रायपुर, अभनपुर, राजिम, गरियाबंद, फिंगेश्वर, तेंदुकोना, आरंग, छुरा तथा अंचल के अन्य अनेक गांवों के आमंत्रित गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुये, समारोह के मुख्य अतिथि जनपद सदस्य पंकज निर्मलकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति का इतिहास, – त्याग और समर्पण से भरा हुआ है, जहां श्रीरामचंद्र जी पितृ आज्ञा का पालन करते हुये राजमहल त्याग कर वनवासी हो गये, वहीं भगवान श्रीकृष्ण, – कारागृह में जन्म लेकर भी द्वारकाधीश हो गये, ये विधाता द्वारा रचा गया सांसारिक खेल है। 

ओम शांति भवन, रानीपरतेवा

संबोधन की अगली कड़ी में ओम शांति भवन रानीपरतेवा के प्रबंधक राजयोगी ब्रम्ह कुमार श्रवण कुमार ने जन्म से मृत्यु तक के जीवन चक्र के रहस्य को बताया, उन्होंने कहा- हर शिशु का जन्म रोते हुये होता है और जीवन यात्रा पूरी करते मृत्युसैया में पड़े हुये रोते हुये ही विदाई लेता है। किन्तु नाम उनका अमर हो जाता है जो हंसते मुस्कुराते हुये इस संसार सागर से विदाई लेते है।

जीवन की इस यात्रा में सुख दुख, मान अपमान, हार जीत की अवस्था में भी जो इंसान समरस रहता है, वह जिंदगी के सफर का आंनद लेते, हंसते मुस्कुराते हुये संसार से विदाई लेता है।

इस सभा को जनपद सदस्य अवधराम साहू, सरपंच हेमलाल नेताम, भाजपा मंडल के संगठन मंत्री पालेंद्र साहू तथा ग्राम कनेसर के सरपंच के द्वारा भी संबोधित किया गया।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अफसाना वंदना बहन के द्वारा परमपिता परमात्मा शिव तथा दिव्य शक्तियों को भोग स्वीकार करवाया गया, ग्राम कसेकेरा तथा फिंगेश्वरी की बच्चियों द्वारा रंगारंग नृत्य प्रस्तुति किया गया। ब्रह्मा भोज के पश्चात समारोह में उपस्थित अतिथियों का शाल व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।

इस आयोजन को सफल बनाने में बीके कुंजरानी निषाद, बीके वंदना कंवर, ग्राम पटेल साधुराम निषाद, मधुसूदन साहू, बसंत यादव, कोमल यदु, की भूमिका सराहनीय रही।

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