RTI के बावजूद नहीं मिली जानकारी, अधिकारी दे रहे गोलमोल जवाब – महेन्द्र साहू

मोहला-मानपुर में खनिज अधिकारी कार्यालय से जवाबदेही नदारद!

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (छत्तीसगढ़),

खनिज संपदा से भरपूर वनांचल जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में खनिज विभाग की जवाबदेही पर सवालिया निशान लगते नजर आ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के विधिक सलाहकार अधिवक्ता महेन्द्र साहू मंगलवार को खनिज संबंधित सूचना प्राप्त करने जिला मुख्यालय स्थित खनिज अधिकारी कार्यालय पहुँचे।

 

 

महेन्द्र साहू ने बताया कि उन्होंने खनिज खनन और खनिज आवंटन से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त करने हेतु सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के अंतर्गत आवेदन किया था। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार, वह शुल्क जमा करने कार्यालय पहुँचे थे, लेकिन वहाँ का हाल देखकर वे स्तब्ध रह गए।

“कार्यालय में न कोई जिम्मेदार अधिकारी था, न कोई जवाबदेही का भाव। जब मैंने कहा कि मैं शुल्क देने आया हूँ, तो उन्होंने शुल्क लेने से भी इनकार कर दिया और कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया।” — महेन्द्र साहू, अधिवक्ता

साहू जी ने बताया कि कार्यालय में उपस्थित कर्मियों ने उन्हें गोलमोल जवाब दिए और बार-बार इधर-उधर भेजते रहे। ना तो कोई जवाबदेह अधिकारी मिला और ना ही RTI की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोई मंशा दिखाई दी।

इस घटना से यह आशंका और गहरी हो गई है कि जिले में खनिज खानों के संचालन में पारदर्शिता नहीं है और अधिकारियों द्वारा जानबूझकर जानकारी छुपाई जा रही है। साहू जी और खनिज विभाग के कर्मियों के बीच हुई बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड की गई है, जिसे वे आवश्यक होने पर सार्वजनिक करेंगे।

खनिज विभाग पर गंभीर आरोप

महेन्द्र साहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिले में खनिज खान आवंटन और संचालन में भारी अनियमितता हो रही है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अधिकारी खनिज माफियाओं के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं और खनिज संपदा का अवैध दोहन हो रहा है।

RTI नियमों का उल्लंघन

सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत किसी भी नागरिक को निर्धारित शुल्क पर जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। यदि कोई कार्यालय सूचना देने में आनाकानी करता है या शुल्क लेने से इंकार करता है, तो यह RTI अधिनियम की सीधी अवहेलना है, जो दंडनीय है।

भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यूनियन जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेगी और राज्य शासन व लोकायुक्त के समक्ष इस पूरे प्रकरण को उठाएगी।

क्या खनिज विभाग किसी दबाव में है? क्या सच में जिले में खनिज माफिया सक्रिय हैं?
इस तरह की घटनाएं न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को भी चुनौती देती हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन-प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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