साधु संतों का अभद्र व्यवहार अवहेलना नारियों के प्रति कहां तक उचित है – निर्मला निशा सिन्हा

भारत वर्ष एक सम्पन्न परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध देश है, जहां महिलाओं का समाज में प्रमुख स्थान रहा है। ग्रामीण परिदृश्य में महिलाओं की बड़ी आबादी है। दुर्भाग्यवंश विदेशी शासनकाल में समाज में अनेक कुरीतियां व विकृृतियां पैदा हुई, जिससे महिलाओं को उत्पीड़न हुआ। हालांकि स्वतंत्रता के दौरान महिलाएं भी कुछ हद तक स्वतंत्र हुई जिन्होंने स्वतंत्रता का महत्व समझा उन्होंने अपने परिवार व अपने देश में नाम रोशन किया।

और जिन्होंने शिक्षित होते हुए भी इसका मतलब ना समझा उन्होंने गलत क़दम तो उठाया ही और हर फैसला गलत लिया भी। जिसके कारण हर उन महिलाओं को प्रताड़ित होना पड़ रहा है। जो अपने चौखट से बाहर क़दम रख कुछ बनना चाहती हैं। अपना नाम रोशन करना चाहती है। जो अपना परिचय खुद देना चाहती है। जो एक ऊंची उड़ान अकेले अपने दम पर भरना चाहती है। हमें अभी भी बहुत कुछ समझने की जरूरत है। जो गंदी सोच कुछ महिलाओं के प्रति फैल रही है। हमें उन्हें अवगत कराना पड़ेगा। उन नारियों को जो राह भटक रही है। उन्हें समझाना होगा नारी शक्ति की महत्ता को उनके योगदान को ये जो आजकल सोशल मिडिया, बालीवुड की फिल्में, सिरियल बन रही है। उनसे दूर ही रखें अपने बच्चों और स्वयं को भी ये सब ग़लत परवरिश,गलत संस्कार के अलावा कुछ नही परोस रही हमारे जनरेशन और आने वाले जनरेशन के लिए यह एक जहर का काम कर रही है। जिससे रिश्ते जल्दी टूट रहें हैं। जहां रिश्तों का कोई मोल नहीं।

जो नकारात्मकता फैलाती हो उसे देखना सुनना बंद करें। आओ बात करते हैं हम नारी शक्ति की महत्ता की और उनके योगदान को समझने की इसके लिए हमें कुछ प्रसिद्ध नारियों के नाम और उनके योगदान को देखना होगा। इन नारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और देश का नाम रोशन किया है। हाल ही में, प्रेमानंद महाराज जी के एक बयान ने विवाद को जन्म दे दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि “आज के समय में 100 में से मुश्किल से दो-चार लड़कियां ही पवित्र होती हैं।” इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हो रही है।

नारी शक्ति की महत्ता

नारी शक्ति की महत्ता को समझने के लिए हमें इतिहास से लेकर वर्तमान तक की नारियों के योगदान को देखना होगा। इंदिरा गांधी, कलाम आजाद, मैरी कॉम, साक्षी मलिक, और किरण बेदी जैसी नारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन नारियों ने न केवल अपने लिए बल्कि पूरे देश के लिए भी गौरव बढ़ाया है।

प्रसिद्ध नारियों के नाम

– *इंदिरा गांधी*: भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री, जिन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, गरीबी हटाओ अभियान चलाया, और देश की सुरक्षा को मजबूत किया। – *कलाम आजाद*: भारत की पूर्व राष्ट्रपति, जिन्होंने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने देश के युवाओं को शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

– *मैरी कॉम*: भारतीय मुक्केबाज, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते और देश का गौरव बढ़ाया। – *साक्षी मलिक*: भारतीय पहलवान, जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने अपने खेल के प्रति समर्पण और कड़ी मेहनत से देश का नाम रोशन किया। – *किरण बेदी*: भारतीय पुलिस अधिकारी, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम किया। उन्होंने अपने काम के प्रति समर्पण और ईमानदारी से देश का गौरव बढ़ाया।

प्रेमानंद महाराज जी का बयान

प्रेमानंद महाराज जी का बयान कि “आज के समय में 100 में से मुश्किल से दो-चार लड़कियां ही पवित्र होती हैं” ने विवाद को जन्म दे दिया है। इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हो रही है। हालांकि, दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी ने भी एक बयान दिया था, जो प्रेमानंद महाराज जी के बारे में नहीं था, बल्कि अनिरुद्धाचार्य के बारे में था। अनिरुद्धाचार्य ने कहा था कि “25 साल की लड़की चार जगह मुंह मार चुकी होती है”। इस बयान के बाद खुशबू पाटनी ने अपना गुस्सा जाहिर किया था और अब वे सफाई दे रही हैं कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी के बारे में कुछ नहीं कहा।

नारी शक्ति की महत्ता और उनके योगदान को समझने के लिए हमें इन प्रसिद्ध नारियों के नाम और उनके योगदान को देखना होगा। हमें प्रेमानंद महाराज जी के बयान को भी समझना होगा और उसकी आलोचना को भी देखना होगा। हमें नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए और उनकी गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए। हमें यह भी समझना होगा कि नारी शक्ति की महत्ता को कम करने वाले बयानों का विरोध करना चाहिए और नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने वाले बयानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

नारी शक्ति की महत्ता और उनके योगदान को समझने के लिए हमें इन प्रसिद्ध नारियों के नाम और उनके योगदान को देखना होगा। हमें प्रेमानंद महाराज जी के बयान को भी समझना होगा और उसकी आलोचना को भी देखना होगा। हमें नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए और उनकी गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए।

नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने और उनकी गरिमा को बनाए रखने के लिए हमें कई कदम उठाने होंगे। हमें महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने होंगे, जिससे वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। हमें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी और उनके साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ लड़ना होगा।

नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने के लिए हमें महिलाओं को प्रोत्साहित करना होगा और उनके योगदान को पहचानना होगा। हमें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करना होगा और उनके लिए अवसर प्रदान करने होंगे। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएं अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हों और अपने हितों की रक्षा कर सकें।

नारी शक्ति की गरिमा को बनाए रखने के लिए हमें महिलाओं के प्रति सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करना होगा। हमें महिलाओं को नीचा दिखाने वाले बयानों और कार्यों का विरोध करना होगा और उनके प्रति सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने को बढ़ावा देना होगा। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएं अपने जीवन में सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।

अंत में, नारी शक्ति की महत्ता को बढ़ावा देने और उनकी गरिमा को बनाए रखने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा। हमें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी, उनके योगदान को पहचानना होगा, और उनके प्रति सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करना होगा। तभी हम एक ऐसा समाज बना पाएंगे जहां महिलाएं अपने जीवन में आगे बढ़ सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें।

और ऐसे महात्म्य संतों से कर निवेदन है कि आप सब जो यहां महान बने हुए बैठे हैं। वो सब हमारी घर की मां बहन बेटियों की श्रद्धा के कारण ही है। तो शिक्षा संस्कार सिखाते समय जरा अपनी जिह्वा पर लगाम कसने की आवश्यकता होती है। पूरी दुनिया आपको सुनती है। कहीं ये श्रद्धा नफ़रत में ना तब्दील हो जाए ऐसा माहौल उत्पन्न करने से बचें।

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