बीजापुर। कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर में आज राष्ट्रीय ‘महिला किसान दिवस’ धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र की प्रगतिशील महिला किसानों, स्व-सहायता समूहों की दीदियों और ग्रामीण महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करना और उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. शमशेर आलम के द्वारा किया गया जिसमें उन्होंने महिला किसान दिवस क्यों मनाया जाना जरूरी है, इस सन्दर्भ मे प्रकाश डाला, साथ ही भारतीय कृषि मे महिलाएं की हिस्सेदारी पे परिचर्चा किएI डॉ. राजकाल पटेल एवम डॉ. अरविन्द आयाम वैज्ञानिकों ने उन्नत तकनीकों और उद्यमिता पर जोर कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने महिलाओं को आधुनिक कृषि, जैविक खेती, मशरूम उत्पादन तकनीक, पोषण वाटिका (न्यूट्रिशन गार्डन), वर्मी कंपोस्ट निर्माण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां दीं।
श्री. अरुण सकनी वरिष्ट वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने कहा कि भारतीय कृषि की रीढ़ ग्रामीण महिलाएं हैं। बीज बोने से लेकर कटाई, भंडारण और पशुपालन तक हर स्तर पर उनकी भागीदारी सबसे अहम होती है। यदि महिलाएं कृषि आधारित कुटीर उद्योग और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो वे परिवार की पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं।
डॉ. सुनीता पटेल, श्रीमती उषा दुर्गम, सुश्री रजिया बेगम एवम अन्य प्रगतिशील महिला किसानों ने कार्यक्रम के सन्दर्भ मे अपने मत रखे, साथ ही साथ महिलाओं को कृषि के नए नए उद्यमों को अपनाकर विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करने पे जोर दिया।अंत मे प्रगतिशील महिला किसानों का सम्मान इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली क्षेत्र की प्रगतिशील महिला किसानों और स्व-सहायता समूहों को शॉल, श्रीफल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानियां साझा करते हुए अन्य बहनों को भी आगे आने और केंद्र की योजनाओं व प्रशिक्षणों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी महिलाओं को केंद्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। अंत में केंद्र के वैज्ञानिकों ने सभी प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
