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*अंगदान पर सम्मान की बात और देहदान पर ज़मीनी हकीकत में विरोधाभास – विष्णु लोधी*

*देहदान पर सरकार की मंशा और व्यवस्था के बीच खाई – विष्णु लोधी*

राजनांदगांव।

छत्तीसगढ़ में मृत्योपरांत अंगदान को राजकीय सम्मान देने संबंधी प्रस्ताव को लेकर जहां सरकार स्तर पर सकारात्मक बातें सामने आ रही हैं, वहीं ज़मीनी सच्चाई इस दावे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। राज्य में पहले से ही देहदान कर चुके लोगों और उनके परिजनों के साथ हुए व्यवहार ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्तीसगढ़ लोधी समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष विष्णु लोधी ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अंगदान और देहदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है, लेकिन सम्मान की बात तभी सार्थक होगी जब पहले देहदान कर चुके लोगों और उनके परिवारों को न्याय व सम्मान मिले।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि राजनांदगांव शासकीय अस्पताल में सेवानिवृत्ति पूर्व वार्ड बॉय स्वर्गीय केवल वर्मा द्वारा देहदान किया गया था। यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक था, लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देहदान के बाद उनके परिवार को सम्मान के बजाय अपमान का सामना करना पड़ा। 24 सितंबर 2025 को स्व केवल वर्मा के परिजनों द्वारा शासकीय मेडिकल कॉलेज, अस्पताल प्रबंधन एवं राजनांदगांव के शासकीय अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी को सूचना देने के बावजूद मृत शरीर को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर मशीन अथवा उचित स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया। अधिकारियों द्वारा यह कहे जाने की बात सामने आई कि शव रखने की व्यवस्था नहीं है और अंतिम संस्कार कर दिया जाए। यह स्थिति न केवल परिवार के लिए पीड़ादायक रही, बल्कि देहदान जैसी पवित्र परंपरा के प्रति सरकारी उदासीनता को भी उजागर करती है।
विष्णु लोधी ने कहा कि जब पहले से देहदान कर चुके व्यक्तियों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है, तो भविष्य में देहदान करने वाले परिवार सरकार पर कैसे भरोसा करेंगे। सम्मान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यवस्था, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से साबित होता है।
उन्होंने कहा कि यह विषय किसी व्यक्ति या पद के विरोध का नहीं, बल्कि देहदान करने वाले स्व. केवल वर्मा और उनके परिवार को सम्मान दिलाने का है। जनहित में आवश्यक है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और संबंधित परिवार को सम्मान व मान्यता दी जाए।
साथ ही यह भी जरूरी है कि राज्य के सभी शासकीय अस्पतालों में देहदान के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी देहदाता या उसका परिवार अपमानित न हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग मानवता के लिए अपना शरीर दान कर चुके हैं, पहले उनका सम्मान सुनिश्चित किया जाए, तभी सरकार के द्वारा अंगदान और देहदान को लेकर की जा रही पत्र-व्यवहार समाज में विश्वास पैदा कर पाएंगी।

राजनांदगांव से दीपक साहू की रिपोर्ट

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