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सरकारी नियमों की धज्जियां: पोड़ी बचरा में रोजगार गारंटी के काम में चल रहा ट्रैक्टर, ग्रामीणों में आक्रोश

बैकुंठपुर (कोरिया)।

जनपद पंचायत बैकुंठपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पोड़ी बचरा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। यहाँ के ‘पुरानी कल तालाब’ के गहरीकरण कार्य में मजदूरों के हक पर डाका डालते हुए धड़ल्ले से ट्रैक्टर का उपयोग किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल से पंचायत के जिम्मेदार सरपंच और सचिव खुद को बेखबर बता रहे हैं, जबकि रोजगार सहायक अधिकारियों के ‘मौखिक आदेश’ की आड़ लेकर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।

मजदूरों के पेट पर लात, मशीनों से हो रहा काम : मनरेगा के कड़े नियम कहते हैं कि योजना के तहत होने वाले तालाब गहरीकरण जैसे कार्यों में केवल मानव श्रम (मजदूरों) का ही उपयोग किया जा सकता है, ताकि ग्रामीण स्तर पर लोगों को रोजगार मिल सके। लेकिन पोड़ी बचरा के पुरानी कल तालाब में मिट्टी फेंकने और उसे हटाने के लिए ट्रैक्टर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मशीनों के उपयोग के कारण स्थानीय मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है और उनके हक की राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।

न सूचना बोर्ड, न कोई लिखित आदेश-सब ‘मौखिक’ नियमतः  किसी भी सरकारी कार्य के शुरू होने से पहले कार्यस्थल पर एक ‘सूचना पटल’ (वर्क बोर्ड) लगाया जाना अनिवार्य है, जिसमें कार्य की लागत, स्वीकृत राशि, मजदूरों की संख्या और तकनीकी स्वीकृतियों की पूरी जानकारी दर्ज हो। लेकिन इस तालाब पर ऐसा कोई बोर्ड मौजूद नहीं है।

जब इस संबंध में ग्राउंड जीरो पर जाकर रोजगार सहायक से सीधी बात की गई, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया। रोजगार सहायक का कहना था:

“बोर्ड जल्द ही लग जाएगा”  रही बात ट्रैक्टर (मशीन) चलाने की, तो हमें सब इंजीनियर (उप-अभियंता) ने मौखिक रूप से ऐसा करने को कहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या मशीन चलाने का कोई लिखित आदेश या उच्च अधिकारियों की अनुमति है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वे केवल ‘मौखिक आदेश’ का ही राग अलापते नजर आए।

जिम्मेदारों की ‘बेखबरी’ पर उठ रहे सवाल : इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव का रवैया है। गाँव में इतना बड़ा काम चल रहा है, दिन-दहाड़े ट्रैक्टर से मिट्टी फेंकी जा रही है, लेकिन सरपंच और सचिव का कहना है कि वे इस पूरे मामले से पूरी तरह ‘बेखबर’ हैं।

अब सवाल यह उठता है कि: क्या वाकई सरपंच-सचिव को अपने ही पंचायत में चल रहे काम की भनक नहीं है?या फिर यह मौन सहमति है ताकि बाद में पल्ला झाड़ा जा सके? कोई भी तकनीकी अधिकारी (सब इंजीनियर) लिखित आदेश देने के बजाय नियम विरुद्ध जाकर मौखिक आदेश क्यों देगा?

भ्रष्टाचार की बू, जांच की मांग : ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि उप-अभियंता (सब इंजीनियर), रोजगार सहायक और कुछ रसूखदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला जा रहा है। ट्रैक्टर मालिक को फायदा पहुँचाने और फर्जी मस्टररोल भरकर राशि आहरण करने की नीयत से इस तरह की गड़बड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने अब इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन और जनपद सीईओ से करते हुए कार्य की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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