शशिकांत सनसनी डोंगरगांव (गिरगांव)।छत्तीसगढ़
थाना क्षेत्र के ग्राम गिरगांव में शनिवार रात एबिस कंपनी द्वारा अवैध रूप से डाले जा रहे मुर्गी वेस्ट (बिट) को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने रात में गांव में घुसी 10 हाइवा ट्रकों को पकड़ लिया और रविवार सुबह से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका स्पष्ट कहना है कि अब गांव में किसी भी कीमत पर मुर्गी वेस्ट नहीं डाला जाएगा।
पांच साल पहले किया गया था वादा, अब बन गई पर्यावरणीय त्रासदी
ग्रामीणों ने बताया कि पांच वर्ष पहले कंपनी ने आश्वासन दिया था कि केवल स्थानीय पोल्ट्री फार्म का वेस्ट ही गिरगांव में डंप किया जाएगा, साथ ही जल सुविधा, वृक्षारोपण और विकास कार्यों के वादे किए गए थे। लेकिन अब स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं, महाराष्ट्र के भी पोल्ट्री वेस्ट को यहां डंप किया जा रहा है।
बदबू और बीमारियों से जीना हुआ मुश्किल
ग्रामीणों ने बताया कि मुर्गी वेस्ट डंपिंग के कारण गांव के जल स्रोत बुरी तरह प्रदूषित हो चुके हैं। पीने के पानी में दुर्गंध और गंदगी के चलते त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और खुजली जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। जानवरों को भी पीने लायक पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी प्रभावित हो रही है, जिससे खेती-किसानी पर संकट मंडरा रहा है।
कंपनी और प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का संयुक्त मोर्चा
गांव में हुई जनसभा में ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने स्थानीय निगरानी समिति का भी गठन किया है, जो भविष्य में डंपिंग गतिविधियों पर नजर रखेगी। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को बुलाने की मांग की और साफ चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसा प्रयास हुआ तो सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कंपनी को मनमानी करने की छूट मिल गई है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीन रवैया इस पर्यावरणीय संकट को और बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों की मांगें:
1. मुर्गी वेस्ट डंपिंग पर पूर्ण प्रतिबंध।
2. गांव के जल स्रोतों की जांच और शुद्धिकरण।
3. कंपनी द्वारा वादे के अनुसार विकास कार्यों की पूर्ति।
4. प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान और निगरानी तंत्र।
गिरगांव की स्थिति अब चेतावनी की घंटी बन चुकी है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले सकती है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तुरंत हस्तक्षेप कर पर्यावरण और ग्रामीण स्वास्थ्य की रक्षा करनी चाहिए।
