✍️ छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
गरियाबंद: जिला मुख्यालय गरियाबंद से लगभग 40 किलोमीटर दुर बसे आदिवासी बाहुल्य व ग्राम पंचायत धवलपुर डीह के आश्रित ग्राम जरण्डीह के ग्रामीण आज आज़ादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधा को तरस रहे हैं। कई बार मूलभूत समस्याओं के समधन हेतु शासन प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद इन आदिवासी ग्रामीणों की सुध लेने अब तक कोई नहीं आया। जिस कारण इन आदिवासी ग्राम और यहाँ के ग्रामीणों की दशा जस की तस है।
ग्रामीण अपने माँगो का समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने अब अपनी मूलभूत समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी दिए हैं। आदिवासी बाहुल्य व ग्राम पंचायत धवलपुरडीह के आश्रित ग्राम जरण्डीह के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग है पक्की डामरकृत सड़क और बीच में पड़ने वाली नदी पर पुल का निर्माण।
चूँकि राष्ट्रीय राजमार्ग धवलपुर से जरण्डीह तक लगभग पांच किलोमीटर की दूरी है। इस मार्ग को पहले भी पक्की डामरीकरण करने हेतु सर्वे कर बक़ायदा गिट्टी व बोल्डर बिछाया गया है लेकिन अभी तक डामरीकरण नहीं किया गया। जिस कारण यहाँ के ग्रामीणों को आने जाने में कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
जरण्डीह मार्ग पर बीच में पड़ने वाली बांकरी नाला जहाँ अब तक पुल नहीं बनने से ग्राम जरण्डीह बरसात के दिनों में टापू बन जाता है। जिस कारण यहाँ के ग्रामीणों का सीधा सम्पर्क जिला मुख्यालय गरियाबंद एवं धवलपुर, मैनपुर जैसे बड़े ग्रामों से कट जाता है। जिससे ग्रामीणों को रोज़मर्रा के जरुरत सामानों, राशन, स्वास्थ्य सेवा के लिए काफ़ी परेशनियाँ होती है। ग्राम में प्राथमिक शाला तक की स्कूल है आगे की पढ़ाई के लिए यहाँ के बच्चों को बाहर जाना पढ़ता है।
ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाले गाँव के बच्चों को भी इसी नदी को पार कर स्कूल जाना व घर आना पड़ता है। ग्रामीणों संग स्कूल में पड़ने वाले बच्चे भी इसी नदी को पार करते हुए स्कूल जाते हैं। कई ग्रामीणों सहित बच्चे भी इस नदी में पार करते हुए अपनी जान गँवा चुके हैं।ग्रामीण रामलाल सोरी, बालकिशन नागेश, गौरीबाई मरकाम ने प्रेस वार्तालाप पर छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ संवाददाता को बताया कि धवलपुर से जरण्डीह तक के मार्ग और नदी में पुल निर्माण के लिए ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधि सहित आला अधिकारियों, कलेक्टर, मंत्री तक आवेदन निवेदन कर चुके हैं।
लेकिन कहीं से भी बने संतोष प्रद जवाब नहीं मिल रहा है। कई बार तो सर्वे करके गए और कहा गया की जल्द ही मार्ग कर डामरीकरण और पुल निर्माण किया जाएगा। मगर अब तक न तो पुल बन पाया है, न पक्की सड़क बन पाया है। बारिश के दिनो मे हमें काफ़ी समस्याओं सामना करना पड़ता है। दैनिक उपयोगी सामान, राशन, स्वास्थ्य सुविधा लिए बारिश के समय में जान जोखिम में डालकर नदी को तैरकर पार करते हुए आवागमन करते हैं। जिसके चलते ग्रामीणों को जान जाने का ख़तरा भी मंडरा रहता है। पूर्व में हमारे गाँव के बच्चे और ग्रामीणों की जान जा चुकी है। कई बार प्रशासन को अवगत करा चुके हैं लेकिन ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
जरण्डीह पहुँचे युवा संघर्ष मोर्चा ज़िलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप ने शासन प्रशासन को साधा निशाना युवा संघर्ष मोर्चा गरियाबंद ज़िलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप आदिवासी बाहुल्य ग्राम जरण्डीह पहुँचे जहाँ ग्रामीणों से चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने अपने बरसों पुराने मूलभूत समस्या से अवगत कराए। इस दौरान युमेन्द्र कश्यप ने शासन प्रशासन के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपनी बातों में कहा की वास्तविकता में ग्राम जरण्डीह के ग्रामीण आज भी अपने मूलभूत समस्याओं के निराकरण कराने संघर्ष कर रहे हैं। दुर्भाग्य यह है की इन भोलेभाले ग्रामीणों के समस्याओं के प्रति ज़िम्मेदारों ने दिलचस्पी नहीं दिखायी जिसका ख़ामियाज़ा यहाँ के ग्रामीणों को भुगतान पड़ रहा है। ग्रामीण ऐसे में आंदोलन की तरफ़ अपना रुख़ मोड़ रहे हैं। यह निराशाजनक है कि शासन प्रशासन के जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदुर अंचल के ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ग्राम जरण्डीह ke व्याप्त समस्या के निराकरण हेतु ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधी सहित कलेक्टर, प्रभारी मंत्री को अवगत करा करके निराकरण करने की बात ज़िलाध्यक्ष ने कही है।
इस मौक़े पर प्रमुख रूप से युवा संघर्ष मोर्चा ज़िलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप, जनपद सदस्य प्रतिनिधी हेमलाल बारले, बलकिशन नागेश, रामलाल सोरी (झाँखर) सोनधर मरकाम, गजपति नागेश, जयमतिन बाई मरकाम, सजनी बाई, सोज़िनबाई, मंगलिन बाई, सुनीता पटेल, गौरीबाई मरकाम, अमृत बाई, राधा मरकाम सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।
