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प्लास्टिक पुनः उपयोग द्वारा पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

पृथ्वी दिवस पर विज्ञान क्लब छात्रों ने प्लास्टिक बॉटल से बर्ड फीडर बनाकर बाँटा और दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

गरियाबंद / राजिम। पृथ्वी दिवस के अवसर पर स्वामी आत्मानंद राजिम के विज्ञान क्लब के विद्यार्थियों द्वारा प्लास्टिक व अनुपयोगी सामाग्रियों का रियुज कर 50 से अधिक बर्ड फीडर का निर्माण सह वितरण कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

पृथ्वी सिर्फ मानव ही नहीं, बल्कि करोड़ों जीव जंतुओं और वनस्पतियों का भी आवास है, लेकिन अपनी बेलगाम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य निरंतर पृथ्वी को कई तरह से नुकसान पहुँचा रहा। लोगों को पृथ्वी और प्रकृति के महत्व के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही 1970 से प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में 192 से अधिक देशों में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इसे इंटनेशनल मदर अर्थ डे के नाम से भी जाना जाता है।
इसी तारतम्य में नगर के स्वामी आत्मानंद विद्यालय में गठित प्रयागराज विज्ञान क्लब द्वारा पृथ्वी दिवस पर पर्यावरण संकट और निवारण उद्देश्यपरक पोस्टर निर्माण एवं वर्तमान वर्ष की थीम ग्रह बनाम प्लास्टिक (Planet vs Plastic) की तर्ज पर प्लास्टिक सामाग्रियों के न्यूनतम उपयोग, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण‌ के प्रति जागरूकता फैलाने के मक़सद से प्लास्टिक बॉटल व अनुपयोगी सामाग्रियों द्वारा बर्ड फीडर अर्थात पक्षियों के दाना पानी की व्यवस्था का उपकरण बनाकर बाँटा गया। विज्ञान क्लब प्रभारी समीक्षा गायकवाड़ ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए वर्ष भर विज्ञान और पर्यावरण संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में छात्रों द्वारा विद्यालय भवन में चिड़ियों के दाना पानी की व्यवस्था की जाती रही है। आगामी ग्रीष्मकालीन भीषण गर्मियों में चिड़ियों के दाना पानी की स्रोत की कमी के कारण अधिकतर पक्षी भूख प्यास से मर जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए ही बच्चों के द्वारा घरों में पाए जाने वाली प्लास्टिक बोतलें, पुराने तेल के टिन व अन्य अनुपयोगी सामग्रियों से कबाड़ से जुगाड़ करते हुए 50 से बर्ड फीडर का निर्माण किया गया एवं शिक्षकों बीएलओ कर्मचारियों व जनमानस को भेंट कर जागरूकता का प्रयास किया तथा शाला परिसर के छत, पेड़ों में लगाया गया। व्याख्याता समीक्षा गायकवाड़ ने बताया कि बहुमंजिली इमारतों , रेडिएशन और तापमान वृद्धि के कारण दाना पानी और घोंसलों की समस्या के चलते गौरैया चिड़ियों की संख्या लगातार घट रही है। इस समस्या के प्रति ध्यानाकर्षण हेतु विद्यार्थियों द्वारा लकड़ी और पुराने कार्टन बक्सों से कृत्रिम घोंसले बनाकर आम जन में वितरित किया गया।
पोस्टर व बर्ड फीडर निर्माण में मुख्य रूप से छात्र रूद्र पटेल, मोनिका देवांगन ,माही सोनी, भूमिका सोनकर ,लक्ष्मी वर्मा, लक्ष्मण पटेल , हितेश्वरी, देवप्रिया साहू, उमा वर्मा, तेजेश सोनकर, शिवम साहू, सावन सोनी , पंकज सोनकर, ऋषभ सेन की सक्रिय भूमिका रही।
विज्ञान क्लब प्रभारी व सदस्य छात्रों द्वारा पर्यावरण जागरूकता की इस अनोखी पहल पर विद्यालय के प्राचार्य संजय एक्का, प्रधानपाठक अजयगिरी गोस्वामी, वरिष्ठ व्याख्याता बीएल ध्रुव, एमके चंदन, एमएल सेन , आरके यादव , सागर शर्मा एनसीसी अधिकारी, संतोष सूर्यवंशी, कमल सोनकर ,मधु गुप्ता,एन एल साहू, व्या. शिक्षिका शिखा महाडिक ,अंजू मारकण्डे ,कैलाश साहू , नीता यादव व्याख्याता साक्षी जपे, प्रणिति चंद्राकर, नेहा सिंह , उपासना भगत एवं नगर पंचायत कर्मचारियो, बीएलओ सदस्यों ने भूरि भूरि प्रशंसा कर उत्साहवर्धन किया।

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