बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की बड़ी पहल, सूरजपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सूरजपुर वनमंडल कार्यालय के सभागार में कक्षा आधारित प्रशिक्षण आयोजित किया गया, प्रशिक्षण सत्र में सरगुजा वन वृत्त में बाघों की वर्तमान एवं ऐतिहासिक उपस्थिति, उनके मूवमेंट, सेंट्रल लैंडस्केप कॉरिडोर एवं लैंडस्केप कनेक्टिविटी, तथा एनटीसीए की टाइगर मैपिंग से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इस दौरान बाघों के संरक्षण एवं निगरानी के साथ-साथ बाघों की मृत्यु के संभावित कारणों, जैसे बीमारी, आपसी संघर्ष, प्राकृतिक वृद्धावस्था तथा मानवजनित कारणों-शिकार एवं विद्युत करंट आदि की पहचान और रोकथाम पर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस पर कोरिया वनमंडल के कटकोना कोलियरी/टेमरी बीट क्षेत्र में व्यावहारिक फील्ड प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षणार्थियों को बाघों की निगरानी एवं संरक्षण से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया।
ट्रैप कैमरा इंस्टॉलेशन एवं मॉनिटरिंग (टीओटीआर) के माध्यम से पेट्रोलिंग एवं डेटा संकलन, मवेशियों के शिकार की पहचान एवं रिकॉर्डिंग, पगमार्क एवं डंग एनालिसिस, एन्टी स्नैर वॉक के माध्यम से अवैध फंदों एवं अन्य खतरों की पहचान तथा नियमित एवं व्यवस्थित फुट पेट्रोलिंग की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, उप निदेशक, एलिफेंट रिजर्व, सरगुजा, वनमंडलाधिकारी, सूरजपुर, तथा उप निदेशक, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित वरिष्ठ वन अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
प्रशिक्षण के प्रमुख सत्रों का संचालन श्री गौरव निहलानी, सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड एवं उप निदेशक, एलिफेंट रिजर्व, सरगुजा द्वारा किया गया। उनके द्वारा बाघ मॉनिटरिंग की आधुनिक तकनीकों, फील्ड प्रोटेक्शन एवं पेट्रोलिंग के दौरान अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत जानकारी दी गई।
साथ ही मैदानी अमले की सुरक्षा एवं प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए ट्रैप कैमरा, वॉकी-टॉकी, टॉर्च, ग्लव्स, वेटरनरी किट तथा टाइगर ट्रैकर्स के पहचान-पत्र जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने एवं उनके समुचित उपयोग की बात कही।
प्रशिक्षण के दौरान बाघ संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों, चरवाहों एवं स्कूली बच्चों को वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टाइगर ट्रैकर्स तैयार करने तथा ‘वाघ चौपाल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में सूरजपुर, कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़ वनमंडल, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व तथा एलिफेंट रिजर्व/तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य के अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों ने सहभागिता की।
प्रशिक्षण में उप वनमंडलाधिकारी (एसडीओ), वन परिक्षेत्राधिकारी (रेनजर), डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, बीट गार्ड एवं टाइगर ट्रैकर सहित मैदानी स्तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
