स्थानीय प्रशासन ने उतारा ससम्मान, पर कार्रवाई अब तक शून्य
शशिकांत सनसनी डोंगरगांव छत्तीसगढ़
डोंगरगांव। स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली घटना नगर के उपडाकघर परिसर में सामने आई। यहाँ ध्वज को सम्मानजनक स्थान पर न फहराकर पुराने टेलीफोन के खंबे पर फहरा दिया गया, जिसे स्थानीय लोगों और मीडिया कर्मियों ने ध्वज संहिता का खुला उल्लंघन बताया।
मामले की जानकारी मिलते ही मीडिया प्रतिनिधि मौके पर पहुँचे और तुरंत प्रशासन तथा पुलिस को सूचित किया। सूचना पर तहसीलदार पी.एल. नाग और पुलिस जवान मौके पर पहुँचे और तिरंगे को ससम्मान उतारा।
मीडिया कर्मियों ने पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों की इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की। हालांकि घटना को 30 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी न तो पुलिस और न ही प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की खबर सामने आई है। इससे प्रशासनिक सुस्ती और उदासीनता साफ झलकती है।
ध्यान रहे कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। वर्ष 2002 में ध्वज संहिता में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया है कि नागरिक किसी भी दिन और रात्रि में ध्वज फहरा सकते हैं, परंतु यह साफ, सुरक्षित और सम्मानजनक स्थिति में होना चाहिए। ध्वज कभी कटे-फटे, मैले या अनुचित स्थान पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
इस घटना ने जहाँ उपडाकघर अधिकारियों की गंभीर लापरवाही उजागर की है, वहीं प्रशासन का निष्क्रिय रवैया भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय मीडिया ने यहाँ तक कि संबंधित कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी कर दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।