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एक ही स्थान पर एक साथ 11 प्रजातियों के वृक्ष : प्रकृति का अनूठा उपहार,सुप्रसिद्ध वृक्षों की श्रेणी में चौथे वृक्ष की उम्मीद

गरियाबंद। जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत कोठीगांव में प्रकृति का एक अद्भुत और दुर्लभ नज़ारा देखने को मिलता है। यहां वर्षों पुराना एक ऐसा विशाल वृक्ष समूह मौजूद है, जिसमें 11 विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष एक ही स्थान पर साथ-साथ विकसित हो गये हैं। इसे स्थानीय लोग प्रकृति का अनोखा चमत्कार मानते हैं।

11 वृक्षों का समूह

इस अद्वितीय वृक्ष समूह में पीपल, नीम, महुआ, कुर्रू, कसही, आम, सीताफल,फेंग,लाडो,केन्वटी, गस्ति सहित कुल 11 प्रजातियों के वृक्ष एक-दूसरे से जुड़े हुये दिखाई देते हैं। अलग-अलग प्रजातियों के वृक्षों का इस प्रकार एक साथ विकसित होना अत्यंत दुर्लभ माना जा सकता है।

इस प्रकार की घटनायें प्रकृति में अत्यंत दुर्लभ तो है, लेकिन असम्भव नही।

भारत में अद्भुत वृक्षों के कुछ उल्लेखनीय उदाहरण मिलते हैं, इनमें प्रयागराज स्थित अक्षयवट, दुनिया के सबसे बड़े बरगद वृक्षों में से एक ” थिम्ममा मर्रीमनु,, के अलावा “डोडा आलदा मारा, के साथ अन्य वृक्षों की प्रजातियां विकसित होती देखी गई है, किन्तु 11 अलग-अलग प्रजातियों का एक ही मूलाधार पर विकसित होना अत्यंत दुर्लभ माना जा सकता है।

यह स्थल न केवल पर्यावरण प्रेमियों और प्रकृति शोधकर्ताओं के लिये आकर्षण का केंद्र हो सकता है, बल्कि जैव विविधता और प्राकृतिक सह-अस्तित्व का भी जीवंत संदेश देता है।

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