Site icon Chhattisgarh 24 News : Daily Hindi News, Chhattisgarh & India News

शासकीय आदिवासी आश्रम में इलाज में लापरवाही, कक्षा 7वीं के छात्र की मौत से हड़कंप

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़

गरियाबंद _शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़ेगोबरा (भाठीगढ़) में इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आश्रम में अध्ययनरत कक्षा सातवीं के आदिवासी छात्र राघव कुमार मंडावी की बीमारी के समय समुचित इलाज न मिलने और देरी के कारण मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं अपने इकलौते बेटे की मौत से परिवार गहरे सदमे में है।
मृतक छात्र राघव कुमार मंडावी, ग्राम गजकन्हार (विकासखंड नगरी) का निवासी था। उसने सत्र 2023–24 में कक्षा छठवीं में प्रवेश लिया था और वर्तमान में कक्षा सातवीं में अध्ययनरत था। परिजनों के अनुसार, राघव पिछले 20 जनवरी से लगातार अस्वस्थ था और आश्रम प्रबंधन से बार-बार माता-पिता को सूचना देने व इलाज कराने की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी बातों को अनसुना किया गया।
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी जब आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने अपने बेटे को बेहद कमजोर हालत में बिस्तर पर पाया। पिता के पूछने पर छात्र ने बताया कि वह कई दिनों से बीमार है, लेकिन अधीक्षक व कर्मचारियों ने न तो इलाज कराया और न ही घरवालों को सूचना दी। इसके बाद पिता तत्काल छुट्टी लेकर बेटे को घर ले गए और इलाज कराया, पर हालत में सुधार न होने पर उसे धमतरी (बठेना अस्पताल) ले जाया गया, जहां शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे छात्र की मौत हो गई।
पिता का दर्द
मृतक छात्र के पिता ने रोते हुए कहा कि यदि समय रहते आश्रम प्रबंधन ने इलाज कराया होता, तो आज उनका बेटा जिंदा होता। उन्होंने आरोप लगाया कि लापरवाही के चलते उनके इकलौते बेटे की जान चली गई।
जनप्रतिनिधियों में आक्रोश
क्षेत्र के जनपद सदस्य एवं आदिवासी नेता सुकचंद ध्रुव ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
आश्रम अधीक्षक की सफाई
आश्रम अधीक्षक राकेश साहू ने कहा कि 17 जनवरी को चिरायु दल द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था, उस समय छात्र स्वस्थ था। उनके अनुसार, 26 जनवरी को छात्र के पिता उसे इलाज के लिए अपने साथ ले गए।
प्रशासन का बयान
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग लोकेश्वर पटेल ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर कुछ कहा जा सकेगा।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शासकीय आदिवासी आश्रमों की स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और परिजनों पर बयान न देने का दबाव बनाया गया। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Exit mobile version