गरियाबंद। जिस नहर में खेतों की सिंचाई के लिये कभी पानी बहता था , अब उस नहर में ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। लोगों ने नहर में मकानों का मलबा इतना डाल दिया है कि अब उसका स्वरूप ही बदल गया है। नहर के स्थान पर अब सीधी सड़क दिखाई देने लगी है।
इस मामले को लेकर जिले के ग्राम मजरकट्टा निवासी कृषक गजेंद्र कुमार नायडू ने जल संसाधन संभाग के उप संभाग क्रमांक 01 के अनुविभागीय अधिकारी के नाम एक शिकायती आवेदन पेश किया है। उन्होंने बताया है कि गरियाबंद से ग्राम चिखली पहुंच मार्ग किनारे खसरा नंबर 413 पर मेरे खेतों के बीच करीब पचास वर्ष पुरानी नहर में मलबा डालकर पाट दिया गया है। जिससे नहर का अस्तित्व समाप्त हो गया है, अब उसकी जगह सड़क का स्वरूप उभर आया है।
बरसों पहले बनी इस नहर की सफाई या मरम्मत भी बरसों तलक नही की गई है। विभाग इसे भूल गया है। जिस प्रयोजन को लेकर इस नहर का निर्माण किया गया था, उस प्रयोजन में कभी इस नहर का उपयोग किया गया हो ऐसे आसार नजर नहीं आते। फिर क्यों बनाई गई थी ये सवाल भी उठता है। गांव के बहुत से लोगों को पता ही नहीं है कि इस नहर में पानी किस काल में गुजरा था।
इतना तो जरूर है कि किसी समय इसे बनाने में लाखों खर्च हुये होंगे।
इस मामले में जल संसाधन संभाग के कार्यपालन अभियंता एस के बर्मन ने कहा फिलहाल शिकायत मेरी जानकारी में नही है, इसलिये अभी कुछ नही बता पाऊंगा। जबकि उप संभाग क्रमांक 01 के एसडीओ आर पी साहू ने कहा कि हाल के वर्षो में पदस्थ होने की वजह से पुरानी नहर की पूरी जानकारी नही दे पाऊंगा , किन्तु फिलवक्त की गई शिकायत के आधार पर विभागीय नोटिस जारी किया गया है।
