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एमसीबी में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में वित्तीय गड़बड़ी का मामला गरमाया, विधानसभा पहुंचा विवाद. महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के खिलाफ जारी किए विभागीय जांच के आदेश; ₹21 लाख की अनियमितता का आरोप

एमसीबी में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में वित्तीय गड़बड़ी का मामला गरमाया, विधानसभा पहुंचा विवाद

महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के खिलाफ जारी किए विभागीय जांच के आदेश; ₹21 लाख की अनियमितता का आरोप

मनेंद्रगढ़/रायपुर।

छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में वर्ष 2024-25 के दौरान ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब राज्य विधानसभा तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील मामले में भारी जन-आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय जांच के औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

​जांच के केंद्र में एमसीबी जिले के तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) शुभम बंसल हैं, जिन पर योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं।

पूर्व विधायक की शिकायत और विधानसभा में ध्यानाकर्षण

​मामले की शुरुआत तब हुई जब क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और विसंगतियों को लेकर तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के विरुद्ध उच्च स्तरीय लिखित शिकायत दर्ज कराई। पूर्व विधायक का आरोप था कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आवंटित फंड में भारी हेरफेर की गई है।

​यह मामला तब और गरमा गया जब वर्तमान विधायक कविता प्राण लहरे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘ध्यानाकर्षण सूचना’ (Calling Attention Motion) लगा दी। विधानसभा में जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे पर सरकार को घेरे जाने के बाद, महिला एवं बाल विकास विभाग तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में मामले की विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू करने के निर्देश जारी किए।

₹21 लाख की सामग्री और व्यय में हेरफेर का अनुमान

​विभागीय प्रतिवेदन से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान बांटी गई सामग्री, उपहारों और अन्य आयोजनों से जुड़े लगभग ₹21 लाख के व्यय से संबंधित गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। प्राथमिक तौर पर यह सामने आया था कि या तो तय मानकों के अनुरूप सामग्री की खरीदी नहीं की गई, या फिर कागजों पर दिखाए गए खर्च और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर था।

कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई

​शिकायत मिलने के बाद एमसीबी कलेक्टर द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच करवाई गई थी। कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन (इन्क्वायरी रिपोर्ट) शासन को भेजने के साथ ही तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल से इस विषय पर स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) मांगा था।

​सूत्रों के अनुसार, शुभम बंसल द्वारा प्रस्तुत किया गया जवाब विभाग को तार्किक और संतोषजनक नहीं लगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिकारी का स्पष्टीकरण पूरी तरह से असंतोषजनक था, जिसके कारण अब उनके खिलाफ पूर्ण रूप से विभागीय जांच (DE) संस्थित की गई है।

दोषियों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

​महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि गरीबों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने आधिकारिक तौर पर कहा:

​”इस मामले की जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस वित्तीय अनियमितता में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

 

​इस कार्रवाई के बाद से जिले के प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम जनता की नजरें अब विधानसभा की कार्रवाई और आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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