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नगर विकास के नाम पर दुकानदारी और ठेकेदारी का खेल

गरियाबंद : जिला मुख्यालय के नगर पालिका में विकास कार्यों का हाल बेहाल है। गरियाबंद नगर विकास की बाट जोह रहा है, किन्तु कुछ जिम्मेदार सिर्फ अपने विकास में लगे हैं। हालांकि नगर को सुंदर बनाये जाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं, किन्तु राजनीतिक रस्सा-कस्सी और स्वार्थ के बीच इन विकास कार्यों में निश्चित मापदंड गायब दिखाई पड़ता हैं। सूत्रों की माने तो, पालिका परिषद के कुछ पदाधिकारी , नगर के विकास कार्यों में अपनी दुकानदारी और ठेकेदारी चला रहे हैं।

पालिका परिषद अंतर्गत पूर्व में किये गये एवं वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता दिखाई नहीं पड़ती है। निर्माण स्थलों में सूचना फलक का भी अता-पता नहीं है। जिससे लोगों को जानकारी ही नहीं लग पा रही है कि विकास कार्यों के लिये शासन से कितनी राशि मिली है और निर्माण कार्य के अधिकृत ठेकेदार कौन है। ज्ञात हो कि नगर पालिका के पदाधिकारी विकास कार्य होने का दावा जरूर कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। एक ही कार्य बार बार किया जा रहा है।

पालिका में 15 वार्ड हैं, जहां अनेक समस्यायें व्याप्त है। नगरवासियों का आरोप है कि नगर के विकास के नाम पर केवल मनमानी की जा रही है। नगर के सर्वांगीण विकास को लेकर पालिका प्रशासन के पास कोई ठोस कार्य योजना नहीं है। कछुये की रफ्तार में निर्माण कार्य चलने से लोगों के बीच असंतोष पनप रहा है।

साई मंदिर गार्डन तहस नहस 

एक बार पहले भी सांई मंदिर के पास लाखों रुपये की लागत से गार्डन बन चुका था , केवल रख रखाव की आवश्यकता थी। अब दुबारा इस गार्डन को जीर्णोद्धार के नाम पर तहस-नहस कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक सांई मंदिर स्थित गार्डन सौंदर्यीकरण के लिये सन 2011 में 16 लाख रुपए खर्च किये गये थे।अब 35 लाख रुपये ? खर्च करने की योजना तैयार की गई है। फिलहाल कार्य बंद है, नगरवासी गार्डन बनने का इंतजार कर रहे हैं।

ओपन गार्डन सवालों के घेरे में

नेशनल हाइवे स्थित रावनभाठा के सामने , सड़क किनारे लाखों रुपये खर्च कर ओपन गार्डन का निर्माण किया गया है, किन्तु ये ओपन नही हो रहा है कि ,कितनी राशि खर्च कर ये गार्डन बनाया गया है , निर्माण स्थल के आस पास कोई सूचना फलक या उल्लेख नहीं है। नेशनल हाइवे के किनारे बना ये ओपन गार्डन सवालों के घेरे में है। भविष्य में सड़क चौड़ीकरण के बाद इस ओपन गार्डन का क्या होगा ? क्या शासकीय राशि बंदर बांट के लिये होती है।

कोई ठोस कार्ययोजना नहीं

नगर के विकास में लाखों रुपये के चल रहे अधोसंरचना के कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है। देखा जाये तो नगर पालिका में विकास कार्य अव्यवस्थाओं से घिरा हुआ है। पिछले दिनों कलेक्टर प्रभात मलिक ने नगर भ्रमण कर व्यवस्था सुधार के निर्देश दिये थे, इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।जिला मुख्यालय में नगर पालिका को सजाने सवांरने की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है। चौक-चौराहे से लेकर अनेक वार्डों को संवारा जा सकता है। लेकिन इस दिशा में कार्य योजना बनाई गई है कि नहीं, कोई बताने को तैयार नहीं है।

नाली तोड़कर दुबारा बनाई गई …. हालत ज्यों की त्यों

पहले भी नगर के गंदे पानी की निकासी के नाम पर पालिका प्रशासन द्वारा नाली निर्माण में लाखों रुपये खर्च किये हैं। नगर की नालियों को कई बार तोड़कर फिर से बनाया गया, किन्तु गंदा पानी जिद पे अड़ा है। जानकारों का मानना है कि नाली निर्माण में सिर्फ खानापूर्ति की गई है, हालत ज्यों की त्यों है। इन नालियों में गंदा पानी बजबजा रहा है, इनमें जानलेवा मच्छर पनप रहे है। जिसकी वजह से नगरवासियों को अपने घरों के गंदे पानी निकासी के लिये परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। नालियों का गंदा पानी सड़कों में जमा हो जाती है। जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

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