सोनारपाल, चपका, मधोता, खैरगुड़ा समेत कई गांवों में खड़ी धान की फसल डूबी, पौधे जड़ से सड़ने लगे; कर्ज और राहत को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
बस्तर(मनोज ठाकुर)। बस्तर विकासखंड के बाढ़ प्रभावित सोनारपाल, चपका, मधोता, खैरगुड़ा, भैंसगांव, बोदरा, टिकनपाल और उसरी सहित कई गांवों में लगातार बारिश और बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगह घरों में पानी घुसने से मकानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण अब सड़ने लगी है। पानी उतरने के बाद कई खेतों में धान के पौधे जड़ से खराब होकर सूखते नजर आ रहे हैं।
किसानों ने बताया कि धान की फसल तैयार करने में खाद, बीज, दवा, मजदूरी और खेती की अन्य लागत पर बड़ी राशि खर्च हुई है। कई किसानों ने खेती के लिए ऋण भी लिया है। ऐसे में खड़ी फसल खराब होने से उनकी पूरी लागत डूबने की चिंता है। घर को हुए नुकसान के साथ फसल बर्बादी ने ग्रामीण परिवारों के सामने आर्थिक संकट और बढ़ा दिया है।
बीमा कराया, पर दावा प्रक्रिया की जानकारी नहीं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के कई किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया है, लेकिन नुकसान की सूचना देने और बीमा दावा करने की प्रक्रिया को लेकर किसानों में स्पष्टता नहीं है। वहीं जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है, वे यह जानना चाहते हैं कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने की स्थिति में शासन की ओर से उन्हें किस प्रावधान के तहत राहत मिल सकती है।
किसानों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित गांवों में मकान और फसल क्षति का मौके पर सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान दर्ज करे। साथ ही बीमित किसानों को दावा प्रक्रिया की जानकारी दी जाए और बिना बीमा वाले पात्र किसानों को उपलब्ध सरकारी राहत प्रावधानों की जानकारी दी जाए।
किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसल लगातार खराब हो रही है, इसलिए नुकसान का सर्वे जल्द शुरू होना जरूरी है। समय पर सर्वे, बीमा प्रक्रिया और राहत कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो बाढ़ की मार से पहले ही परेशान किसान आर्थिक संकट में और गहरे फंस सकते हैं।
