रायपुर : शिक्षकों की सेवा और पदोन्नति में TET की बाध्यता, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना और विभागीय D.Ed./B.Ed. प्रशिक्षण के लिए ब्रिज कोर्स की मांग को लेकर चल रहे शिक्षक आंदोलन को अब छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक महासंघ ने समर्थन देने का ऐलान किया है।
महासंघ की ओर से आयोजित ऑनलाइन बैठक में प्रदेश के 11 से अधिक शिक्षक संगठनों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि 27 अगस्त को होने वाले शिक्षक आंदोलन में महासंघ पूर्ण सहभागिता करेगा।
TET की बाध्यता खत्म करने समेत 4 प्रमुख मांगें
महासंघ ने शिक्षकों के हित में चार प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। इनमें सेवा एवं पदोन्नति में TET की बाध्यता समाप्त करना, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करना, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करना तथा विभागीय D.Ed./B.Ed. प्रशिक्षण के लिए ब्रिज कोर्स शुरू करना शामिल है।
महासंघ का कहना है कि TET की बाध्यता के कारण कई शिक्षकों के सेवा एवं पदोन्नति से जुड़े अवसर प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने सरकार से इस मामले में तत्काल समाधान की मांग की है।
वहीं प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना किए जाने की मांग करते हुए महासंघ ने कहा कि इससे शिक्षकों को वरिष्ठता एवं अन्य सेवा लाभों में न्याय मिल सकेगा। सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने और न्यायसंगत वेतनमान देने की मांग भी उठाई गई है।
27 अगस्त को आंदोलन में शामिल होंगे शिक्षक संगठन
महासंघ ने कहा कि 27 अगस्त का आंदोलन किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के सेवा अधिकार, वेतन, पदोन्नति, वरिष्ठता और भविष्य से जुड़े मुद्दों का साझा आंदोलन है। महासंघ ने प्राथमिक शिक्षक से लेकर प्रधान पाठक, शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य तक सभी शिक्षकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। संगठन ने सरकार से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की बात कही है।
बैठक में कृष्ण कुमार नवरंग, राज नारायण द्विवेदी, शंकर साहू, विष्णु प्रसाद साहू, विक्रम राय, धर्मदास बंजारे, चेतन दास बघेल, कमलदास मूरचले, प्रीतम कोशले, राजकिशोर तिवारी, अनिल टोप्पो, शिव सारथी, छोटेलाल साहू और नरेंद्र जांगड़े सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। महासंघ ने स्पष्ट किया कि वह वर्तमान शिक्षक आंदोलन को समर्थन देते हुए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षक हित की मांगों को उठाएगा।
