Site icon Chhattisgarh 24 News : Daily Hindi News, Chhattisgarh & India News

कांग्रेस प्रदेश प्रतिनिधि तपेश्वर सिंह ठाकुर ने प्रदेश वासियों को दी छेरछेरा पर्व की बधाई

कांग्रेस प्रदेश प्रतिनिधि तपेश्वर सिंह ठाकुर ने प्रदेश वासियों को दी छेरछेरा पर्व की बधाई

गरियाबंद : कांग्रेस प्रदेश प्रतिनिधि जिला गरियाबंद के तपेश्वर सिंह ठाकुर ने जिले एवं प्रदेश वासियों को दी छेरछेरा पर्व की बधाई एंव शुभकामनाएं श्री तपेश्वर सिंह ठाकुर ने अपने बधाई संदेश में कहा कि आज छेरछेरा पर्व है छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह भी पढ़ें/Also Read : गरियाबंद न्यूज़ – अधेड़ की मिली लाश, हत्या कर पैरा में छुपाई गई थी लाश, जांच में जुटी पुलिस… जाने पूरी मामला

इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार भी कहते हैं इसे दान करने का पर्व माना जाता है इस दिन छत्तीसगढ़ में युवक युवती और बच्चे सभी छेरछेरा अनाज मांगने घर घर जाते हैं छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी का अलग ही महत्व है वर्षों से मनाएं जाने वाला यह पारंपरिक लोक पर्व साल के शुरुआत में मनाया जाता है इस दिन रुपए पैसे नहीं बल्कि अन्न का दान करते हैं धान का कटोरा कहा लाने वाला भारत का एकमात्र प्रदेश छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान प्रदेश है।

यह भी पढ़ें/Also Read : गरियाबंद न्यूज़ – 1 से 15 जनवरी तक शिक्षा विमर्श हेतु जनसंवाद का हुआ आयोजन

यहां पर ज्यादातर किसान वर्ग के लोग रहते हैं कृषि ही उनके जीविकोपार्जन का मुख्य साधन होते हैं यही वजह है कि कृषि आधारित जीविकोपार्जन और जीवन शैली ही अन्न दान करने का पर्व मनाने की प्रेरणा देती है अपने धन की पवित्रता के लिए छेरछेरा तिहार मनाया जाता है क्योंकि जनमानस में यह अवधारणा है कि दान करने से धन की शुद्धि होती है छेरछेरा पर बच्चे गली मोहल्ला घरों में जाकर छेरछेरा दान मांगते हैं।

यह भी पढ़ें/Also Read : गरियाबंद न्यूज़ – स्मृति नीरज ठाकुर ने प्रदेशवासियों को लोक पर्व छेरछेरा की दी बधाई

दान लेते समय बच्चे छेरछेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा कहते हैं और जब तक आप अन्नदान नहीं देंगे तब तक वह कहते रहेंगे अरन बरन कोदो करन जबभे देबे तबभे टरन इसका मतलब यह होता है कि बच्चे आपसे कह रहे हैं मां दान दो जब तक दान नहीं दोगे तब तक हम नहीं जाएंगे जनश्रुति के अनुसार एक समय धरती पर घोर अकाल पड़ा इससे इंसान के साथ जीव-जंतुओं मे भी हाहाकार मच गया तब आदि शक्ति देवी शाकंभरी को पुकारा गया जिसके बाद देवी प्रकट हुई और फल फूल अनाज का भंडार दे दिया।

यह भी पढ़ें/Also Read : गरियाबंद न्यूज़ – 11 लोगो ने किया अवैध अतिक्रमण, वन विभाग ने भेजा जेल

जिससे सभी की तकलीफ दूर हो गई इसके बाद से ही छेरछेरा पर्व मनाए जाने की बात कही जाती है श्री तपेश्वर सिंह ठाकुर ने आगे कहा कि जो भिक्षा मांगता है वह ब्राम्हण कहलाता है और जो भिक्षा देता है उसे देवी कहा जाता है जैसे मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी जनश्रुतियों के अनुसार ऐसे ही छेरछेरा के दिन मांगने वाला याचक यानी ब्राह्मण होता है और देने वाले को शाकंभरी देवी का रूप माना जाता है।

Exit mobile version