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जान पर खेलकर समर्थकों ने किया नेताजी का स्वागत, राजधानी में कानून की खुलेआम धज्जियाँ — रायपुर पुलिस मौन, उठे कई सवाल

रायपुर – शराब घोटाले जैसे गंभीर और बहुचर्चित मामले में जमानत पर रिहा हुए पूर्व मंत्री कवासी लखमा के स्वागत ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को शर्मसार कर दिया। रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर से लेकर शहर के अलग–अलग चौक–चौराहों और हाईवे तक जिस तरह से समर्थकों ने ताकत का प्रदर्शन किया, वह सीधे–सीधे कानून, व्यवस्था और आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ था।

नेताजी के स्वागत की होड़ में समर्थक तेज़ रफ्तार लग्ज़री गाड़ियों में सवार होकर सड़कों पर स्टंट करते दिखे। कोई गाड़ी की खिड़की से बाहर लटकता नजर आया, तो कोई सनरूफ पर खड़े होकर नारेबाजी करता रहा। कई वाहन तो हाईवे पर खतरनाक स्पीड में दौड़ते रहे, जहाँ एक छोटी सी चूक किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती थी।

रायपुर पुलिस थी कहाँ

छत्तीसगढ़ की राजधानी में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद बड़े अधिकारियों ने दावा किया था कि ट्रैफिक व्यवस्था राजधानी की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी, नियमों में सख्ती आएगी और कानून तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई होगी। लेकिन कवासी लखमा के स्वागत के दौरान ये सारे दावे हवा होते नजर आए। दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो रायपुर पुलिस के लिए किसी करारे तमाचे से कम नहीं हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह नियमों को रौंदते हुए राजनीतिक हुड़दंग मचाया गया। न हेलमेट, न सीट बेल्ट, न ट्रैफिक नियमों की परवाह — बस सत्ता का नशा और सड़क पर खुला प्रदर्शन।

 

जेल से रिहाई के बाद समर्थकों ने इसे जश्न नहीं, बल्कि सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। शहर की आम जनता, राहगीर, दोपहिया चालक और परिवारों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। क्या राजधानी की सड़कों पर आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है…

कानून की दोहरी तस्वीर साफ दिखती है।

आम आदमी अगर बाइक पर हेलमेट न पहने या कार में सीट बेल्ट न लगाए, तो ट्रैफिक पुलिस बिना देर किए चालान थमा देती है, गाड़ी जब्त कर लेती है और नियमों का पाठ पढ़ाती है। लेकिन जब राजनीतिक झंडे लगे काफ़िले सड़कों पर मौत का खेल खेलें, तब पुलिस की सख्ती क्यों गायब हो जाती है?

अब देखना होगा कि रायपुर पुलिस इन कांग्रेस समर्थकों पर कार्रवाई करेगी, क्या तेज रफ्तार, खतरनाक स्टंट और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ FIR दर्ज होगी या फिर राजनीतिक रसूख के आगे कानून एक बार फिर मजबूर और बेबस नजर आएगा…कानून की किताब साफ कहती है — कानून सबके लिए बराबर है। लेकिन रायपुर की सड़कों पर जो दिखा, उसने इस बराबरी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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