* खैरागढ़ में जिला स्तरीय जेंडर कार्यशाला सम्पन्न, समानता और सशक्तिकरण पर जोर, जेंडर भेदभाव खत्म करने की पहल…
* जेंडर समानता से ही होगा समग्र विकास: खैरागढ़ कार्यशाला में विशेषज्ञों का संदेश…
* महिला अधिकार और लैंगिक संवेदनशीलता पर खैरागढ़ में हुआ व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम…
कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रेम कुमार पटेल द्वारा की गई। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जेंडर समानता, महिला अधिकारों एवं संवेदनशीलता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया ।
कार्यशाला में जेंडर से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे लैंगिक भेदभाव की पहचान, महिलाओं के प्रति होने वाले उत्पीड़न की रोकथाम, कार्यस्थल पर समान अवसर सुनिश्चित करने तथा समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि जेंडर समानता केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि यह समाज के समग्र विकास से जुड़ा विषय है, जिसमें सभी की सहभागिता आवश्यक है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब समाज में महिलाओं को समान अवसर, सम्मान एवं सुरक्षा प्रदान की जाए।
उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता एवं निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों एवं मैदानी अमले को जेंडर संवेदनशीलता को अपने कार्यों में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
कार्यशाला में जेंडर बीआरपी, सीएलएफ के पदाधिकारी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के जिला एवं विकासखंड स्तर के स्टाफ तथा पीआरपी सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
उसके बाद घरेलू हिंसा के लिए दूसरे कारण के रूप में विभिन्न प्रकार की नशा है जिसमें शराब, गाँजा ,बीड़ी सिगरेट तम्बाकू गुटखा गुड़ाखू आदि हैं ।स्वास्थ्य विभाग से आमंत्रित सोनी जी और साहू जी ने सह विस्तार अपनी योजनाओं को धरातल पर कैसे क्रियान्वित करते हैं उन्हें बताया वास्तविकता टेक्निकल बातों को बताया ।जानवी जोशी अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन छत्तीसगढ़ ने अपने आसपास होने वाली घटना को बताया कि आज घर में भी लड़के और लड़कियों में किस तरह भेदभाव किया जाता है जो बहुत बड़ी चुनौती है स्वतंत्रता का सही मायने क्या होनी चाहिए और आज लोग कैसे गलत अर्थ निकाल रहे हैं सहनशीलता की कमी स्मार्ट बनने के चक्कर में बर्बाद हो रहे हैं।