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वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर जिला दुर्ग की सशक्त पहल

वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर जिला दुर्ग की सशक्त पहल

“वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर जिला दुर्ग की सशक्त पहल : निकुम, अरसनारा एवं ननकट्ठी में सामुदायिक मध्यस्थता जागरूकता अभियान का सफल आयोजन”

दुर्ग ; राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी “Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India” Standard Operating Procedure (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा चयनित ग्रामों में सामुदायिक मध्यस्थता जागरूकता अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इसी क्रम में ग्राम निकुम, अरसनारा एवं ननकट्ठी में जागरूकता एवं संवाद बैठकों का आयोजन कर ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की उपयोगिता एवं उसके व्यावहारिक स्वरूप से अवगत कराया गया।

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इस अवसर पर स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक द्वारा संबंधित ग्रामों का भ्रमण कर ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं, युवाओं, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs) एवं ग्रामीण नागरिकों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित किया गया।

बैठकों में ग्रामीणों को बताया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि विवादों के प्रारंभिक स्तर पर सौहार्दपूर्ण समाधान का एक प्रभावी माध्यम है। पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि, रास्ता, पानी, घरेलू तथा अन्य स्थानीय विवादों का समाधान यदि आपसी संवाद, सहमति एवं मध्यस्थता के माध्यम से समय रहते कर लिया जाए, तो न केवल न्यायालयों पर अनावश्यक वादभार कम होगा, बल्कि सामाजिक संबंधों में भी स्थायित्व एवं विश्वास बना रहेगा।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल सहित कुल 05 ग्रामों का चयन सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए किया गया है। इन ग्रामों में चरणबद्ध रूप से जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, संवाद सत्र एवं मध्यस्थता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान की सुदृढ़ एवं सहभागी व्यवस्था विकसित हो सके।

स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता केवल विवादों के समाधान की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, सहयोग एवं सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि छोटे-छोटे विवादों को न्यायालय तक ले जाने के बजाय संवाद एवं मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की सकारात्मक परंपरा को अपनाएं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों एवं अन्य विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ, त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि यह पहल ग्रामीण समाज में अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने के साथ-साथ सामाजिक एकता एवं सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगी। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, महिलाओं, युवाओं, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs) तथा गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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