कोरिया: प्रसिद्ध पर्यटन स्थल झुमका बांध में फटा तिरंगा देखकर लोगों में भारी आक्रोश, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
बैकुंठपुर (कोरिया)
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का सबसे प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन स्थल झुमका बांध इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर चर्चा में है। यहाँ आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के बीच उस समय भारी नाराजगी और आक्रोश फैल गया, जब उन्होंने देखा कि देश की आन-बान-शान का प्रतीक हमारा राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ वहाँ फटी हुई अवस्था में लहरा रहा है।
राष्ट्रध्वज के इस अपमान को लेकर लोगों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ गहरा रोष है।
क्या है पूरा मामला?
झुमका बांध को जिले के एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ रोजाना सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और दूर-दराज से पर्यटक आते हैं। यहाँ पर्यटकों के आकर्षण के लिए एक विशाल और ऊंचा राष्ट्रध्वज (हाई-मास्ट तिरंगा) लगाया गया है।
चश्मदीदों और स्थानीय लोगों का कहना है: “पिछले कुछ दिनों से हवा के थपेड़ों या उचित रख-रखाव के अभाव में तिरंगे का एक हिस्सा काफी फट चुका है। बेहद दुख की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर अब तक नहीं पड़ी या फिर इसे देखकर भी नजरअंदाज किया जा रहा है।”
‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ का खुला उल्लंघन
भारत के राष्ट्रीय ध्वज को फहराने और उसके रख-रखाव के लिए एक निश्चित कानून है, जिसे ‘भारतीय ध्वज संहिता’ (Flag Code of India) कहा जाता है। इसके नियमों के मुताबिक:
किसी भी परिस्थिति में फटा, पुराना या मटमैला तिरंगा नहीं फहराया जा सकता।
यदि तिरंगा किसी कारणवश फट जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे ससम्मान उतारकर पूरी मर्यादा के साथ एकांत में नष्ट या दफन करना होता है, और उसकी जगह नया ध्वज लगाना होता है।
झुमका बांध में फटे तिरंगे का इस तरह लहराते रहना सीधे तौर पर राष्ट्रीय गौरव के अपमान और नियमों के खुले उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
सैलानियों द्वारा इस फटे हुए तिरंगे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद यह मामला तेजी से गरमा गया है। लोग कमेंट्स और पोस्ट के जरिए प्रशासन को आड़े हाथों ले रहे हैं।
स्थानीय नागरिक नवीन कुमार ने कहा: “झुमका बांध हमारे जिले की पहचान है। यहाँ देश-विदेश से लोग आते हैं। ऐसे में देश की शान तिरंगे को इस हालत में देखना हर सच्चे भारतीय के दिल को दुखाने वाला है। यह अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है।”
युवाओं का कहना है: “जो प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर पर्यटन स्थल का सौंदर्यीकरण कर सकता है, क्या वह समय पर एक नया तिरंगा नहीं बदल सकता? दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”
अब तक क्या कदम उठाए गए?
इस मामले में जब स्थानीय जागरूक नागरिकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, तब जाकर विभाग हरकत में आता दिख रहा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक फटे हुए ध्वज को बदलने या ससम्मान उतारने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी, जिससे लोगों में नाराजगी बरकरार है।