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वनों को आग से बचाना वन विभाग की पहली प्राथमिकता – डीएफओ ससीगानंधन

अग्नि सुरक्षा विषय पर गरियाबंद वनमंडल में कार्यशाला संपन्न

गरियाबंद। वन मंडल गरियाबंद द्वारा आगामी अग्नि सीजन में वनों को आग से बचाने की तैयारियों को मजबूत करने के लिये एक महत्वपूर्ण वनाग्नि सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

कार्यक्रम में विशेष रूप से वन मंडलाधिकारी ससीगानंधन, उप वनमंडलाधिकारी देवभोग मनोज चंद्राकर, उपप्रबंध संचालक गरियाबंद नदीम कृष्ण बरिहा द्वारा सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों प्रबंधकों एवं श्रमिकों को अग्नि सुरक्षा संबंधी विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला के दौरान वन क्षेत्रों में आग लगने के प्रमुख कारण, उससे होने वाली क्षति,आग की रोकथाम के उपाय, तथा आपातकालीन स्थिति में त्वरित एवं सुरक्षित कार्यवाही की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

इस अवसर पर विशेष रूप से उपवनमंडल अधिकारी गरियाबंद राकेश चौबे वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र साहू, पाण्डुका वन रेंज ऑफिसर संतोष चौहान, धवलपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी कामता मरकाम, लवकुश पांडे सहित बड़ी संख्या में वन कर्मचारी मौजूद रहे।

वनमंडलाधिकारी ससीगानंधन ने कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुये कहा कि जंगलों को आग से बचाना वन विभाग की पहली प्राथमिकता है ,उन्होंने सभी से अपील की, कि गांव जाकर आम जनता को जंगलों की अग्नि सुरक्षा के लिये जागरूक करें। लोगों को समझायें कि वनाग्नि रोकना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। किसी भी आग की सूचना तुरंत विभाग को दें। और जंगलों के आसपास ग्रीष्म काल में ऐसे कार्य न करें जिससे आग लगने की संभावना रहे।

उन्होंने बताया कि अग्नि सीजन 16 फरवरी से 15 जून 2026 तक चलेगा, इस दौरान वनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रहेगा, विगत वर्षों के अच्छे प्रयासों से अग्नि घटनाओं पर नियंत्रण हुआहै, इस वर्ष भी इसी दिशा में प्रयास जारी रखना है।

अग्नि रेखाओं (फायर लाइनों) की कटाई, सफाई और नियंत्रित जलाई 15 फरवरी से पहले सुनिश्चित की जायेगी। अग्नि रक्षकों की नियुक्ति और उनकी मौजूदगी सुनिश्चित की जाये, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर नियर रियल टाइम फायर अलर्ट एसएमएस के जरिये प्राप्त होंगे, सूचना मिलते ही तत्काल आग पर नियंत्रण के प्रयास प्रारंभ करने हैं।

वन समितियों की मासिक बैठकों में अग्नि सुरक्षा पर चर्चा अनिवार्य रूप से करते हुये समितियों को सक्रिय जवाबदारी दी जाये, जानबूझकर आग लगाने, शिकार या अवैध कटाई छिपाने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई की जायेगी, तेंदूपत्ता संग्रहण और फड़ क्षेत्रों में भी अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उल्लंघन पर करारनामा शर्तों के तहत कार्यवाही कि जायेगी।

इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक द्वारा लघु वनोपज संग्रहण के समय अग्नि सुरक्षा के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि लघु वनोपज संग्रहण के दौरान थोड़ी-सी असावधानी भी गंभीर वनाग्नि का कारण बन सकती है, जिससे वन संपदा, वन्यजीव एवं ग्रामीण आजीविका को भारी नुकसान हो सकता है। अतः संग्रहण कार्य के दौरान बेहतर है कि ग्रामीण आग ना लगाये, सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है।

कार्यशाला में गरियाबंद वन मंडल के सभी 9 वनपरिक्षेत्रों के अधिकारी एवं 100 कर्मचारी, लघु वनोपज संघ के लगभग सभी 70 प्रबंधक, तथा लगभग 200 सुरक्षा श्रमिक उपस्थित रहे। सभी ने वनाग्नि की रोकथाम हेतु विभागीय समन्वय, सतर्कता एवं जनसहभागिता को अत्यंत आवश्यक बताया।

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