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संतरामपाल जी महाराज : “जीवन सुधारने के लिए सत्संग मूल आधार”

सेलूद : मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के द्वारा जिला बीते रविवार सेलूद (पाटन) में आयोजित एक सत्संग कार्यक्रम में संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों ने शिरकत की। इस मौके पर संत जी ने बताया कि जीवन सुधारने और सही मार्ग पर लाने के लिए सत्संग मूल आधार है। जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति में सत्संग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

सत्संग क्या है? सत्संग का अर्थ है यथार्थ अध्यात्म ज्ञान का प्रचार जिसमे केवल सत्य हो, असत्य ना हो। ऐसा दिया जाने वाला अध्यात्म ज्ञान सत्संग कहलाता है। जिसके विस्तार मे किसी भी प्रकार की शंका जीव को ना रहे वो ही सत्संग है और उसे स्वयं संत या सतगुरु ही करते है। सत्संग का वर्णन करते हुए संत रामपाल जी महाराज जी ने पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी की वाणी बताते हुए कहा कि , “सत्संग की आधी घड़ी, तप के वर्ष हजार। तो भी बराबर है नहीं, कहे कबीर विचार॥” यह सत्संग की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके लाभों को दर्शाता है। यह वाणी स्पष्ट करती है, कि सत्संग के थोड़े से समय का महत्व तपस्या के हजारों वर्षों से अधिक होता है।

अर्थात सत्संग उस परमेश्वर का यथार्थ ज्ञान देना है जिसकी भक्ति करके जीव इस भवसागर से पार होकर 84 लाख योनियो मे जन्म मरण के चक्र से छूट जाता है। जिसे मुक्ति, मोक्ष प्राप्त हो जाना कहते हैं। सत्संग में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि , सत्संग हमारे जीवन के लिए उतना ही आवश्यक है, जितना कि शरीर के लिए भोजन। भोजनादि से हम शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं, किंतु आत्मा जो इस शरीर की मालिक है, उसकी संतुष्टि के लिए कुछ नहीं करते हैं। इसलिए हमें अपनी आत्मा की संतुष्टि के लिए सत्संग अवश्य सुनना चाहिए।

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