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संत रामपाल जी महाराज : पांवचवें वेद “सूक्ष्मवेद” में अध्यात्म का संपूर्ण ज्ञान है जिसको “तत्वज्ञान” कहते हैं ।

रानीतराई :- दिनांक 14 जुलाई को दुर्ग में जिला स्तरीय सत्संग का आयोजन संत रामपाल जी महाराज के तत्वधान में आयोजित किया गया जिसमें सत्संग के माध्यम से यह बताया गया कि हमारे सभी धर्म ग्रंथो का सार तत्व है वह “सच्चिदानंद ब्रह्म” की वाणी में निहित है उसको “सूक्ष्मवेद” कहते हैं इसमें वह तत्व ज्ञान है जो हमें हमारे सभी धार्मिक ग्रंथो की वास्तविकता व सही भक्ति विधि का परिचय कराता है क्योंकि अभी जब तक हम जो भी साधना भक्ति करते हैं वह मनमाना आचरण है जिसका गीता अध्याय 16 के 23 में प्रमाण है गीता ज्ञान दाता अर्जुन को शास्त्र में निहित विधि से भक्ति साधना को करने को कह रहा है और यह भी बता रहा है कि इसकी पूरी विधि किसी तत्वदर्शी संत के पास है जिसका प्रमाण गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में वर्णित है जिसके पास परमातम तत्व का संपूर्ण अध्यात्म ज्ञान है और वह तत्वदर्शी संत आज पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज है जो अपनी सही भक्ति विधि अपने अनुयायियों को प्रदान कर रहे हैं जिससे सभी को कई प्रकार से लाभ हो रहे हैं किसी की आर्थिक स्थिति ,किसी की गंभीर बीमारी, वह अनेक विकारों से सभी दूर हो रहे हैं और एक स्वच्छ समाज का निर्माण कर रहे हैं। सत्संग में यह भी बताया गया कि जो मानव जीवन है बहुत ही अमूल्य है इस आधुनिकता की दौड़ में हम अपने भौतिक संसाधनों और अपने स्वार्थ के सुखों के लिए भक्ति तो करते हैं पर वह दिखावा है आज हजारों धर्मगुरु है पर कोई अपने सद ग्रंथो से वास्तविक परिचित नहीं है, मनमाना भक्ति साधना करवा रहे हैं जिससे किसी को कोई लाभ होना नहीं है ।जबकि संत रामपाल जी महाराज अपने वेद शास्त्रों और सभी धर्म ग्रंथो को सबको पढ़ाते हैं और दिखाते भी हैं और उसका आचरण भी कराते हैं जिसका परिणाम यह है कि सभी अनुयाई को उनका लाभ मिल रहा है इसलिए सर्व समाज से प्रार्थना है की एक बार संत रामपाल जी महाराज का सत्संग अवश्य सुने और गहनता से विचार करें क्योंकि यह मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता इस प्रकार कई दूर-दूर क्षेत्र से आए सभी सत्संग प्रेमियों को सत्संग सुनने का अवसर प्राप्त हुआ जिसमें जिला ,क्षेत्रीय एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर भी उपस्थित थे।
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