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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीसी रोड? ‘कौन सा बोर्ड’ पूछकर नियमों का मजाक उड़ा रहे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि!

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीसी रोड? ‘कौन सा बोर्ड’ पूछकर नियमों का मजाक उड़ा रहे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि!

 

कोरिया। विकास कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी का दावा करने वाली ग्राम पंचायतों की पोल अब कोरिया जिले के पोड़ी बचरा में खुलती नजर आ रही है। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर सीसी रोड का निर्माण कार्य आनन-फानन में पूरा तो कर लिया गया है, लेकिन सरकारी गाइडलाइंस की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब इस लापरवाही पर सवाल उठाए गए, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जवाबों ने लोकतंत्र और सरकारी नियमों का सरेआम मजाक बनाकर रख दिया है।

नियमों का ‘कत्ल’, सूचना बोर्ड नदारद

शासकीय नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण कार्य के प्रारंभ होने से पूर्व कार्यस्थल पर ‘सूचना पटल’ (Citizen Information Board) लगाना अनिवार्य है। इस बोर्ड पर कार्य की कुल लागत, स्वीकृत मद, निर्माण की समय-सीमा और क्रियान्वयन एजेंसी का विवरण होना चाहिए। लेकिन पोड़ी बचरा में सीसी रोड बनकर तैयार हो गई, भुगतान की तैयारी हो गई, पर सूचना बोर्ड का कहीं अता-पता नहीं है। आखिर इस ‘गुमनाम’ निर्माण के पीछे क्या राज छिपा है?

जनप्रतिनिधियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: “कौन सा बोर्ड?”

जब ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस संबंध में सवाल किया, तो जनप्रतिनिधियों के तेवर देखने लायक थे। जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कुछ जनप्रतिनिधि मासूमियत का ढोंग करते हुए पूछते हैं— “कौन सा बोर्ड?” वहीं कुछ का कहना है कि “बोर्ड लग जाएगा”। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी नियम इन प्रतिनिधियों के लिए महज एक औपचारिकता हैं? क्या पंचायत के इन कर्ता-धर्ताओं को शासन के कड़े निर्देशों का कोई भय नहीं है?

भ्रष्टाचार की गहरी बू और ग्रामीणों का आक्रोश

बिना सूचना बोर्ड के काम पूरा होना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। लागत और तकनीकी जानकारी सार्वजनिक न करने का उद्देश्य स्पष्ट है— घटिया सामग्री का उपयोग और बजट की बंदरबांट।

“जब हमें पता ही नहीं कि सड़क की मोटाई कितनी होनी चाहिए और इसमें कितना पैसा लगा है, तो हम गुणवत्ता की जांच कैसे करें? यह सीधा-सीधा जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।” — आक्रोशित ग्रामीण

प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल

ग्रामीणों का पूछना है कि क्या उच्चाधिकारी भी इस ‘अंधेरगर्दी’ में शामिल हैं? बिना सूचना बोर्ड और बिना पारदर्शिता के कार्य पूर्ण होने के बाद भी प्रशासन मौन क्यों है? क्या इस निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन (Verification) किया गया है?

पोड़ी बचरा की जनता ने अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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