शशिकांत सनसनी गरियाबंद छत्तीसगढ़
गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक का प्राथमिक शाला तेतलपारा—122 बच्चों वाला यह सरकारी स्कूल जर्जर इमारत, असुरक्षित बरामदे और शराब के नशे में चूर प्रधान पाठक के सहारे चल रहा है। यहां बच्चों का भविष्य किस हाल में है, देखिए ये रिपोर्ट।
स्कूल के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हैं। पढ़ाई, खेलकूद और मध्यान्ह भोजन—सब एक ही असुरक्षित बरामदे में। बारिश हो या धूप, बच्चों को दिनभर इसी जगह में रहना पड़ता है।
प्रधान पाठक देवनारायण सिंह हमेशा नशे में धुत रहते हैं। मीडिया टीम के सामने वे लड़खड़ाते हुए आए और पत्रकारों से अभद्रता की। यहां तक कि वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री के नाम तक नहीं बता सके। पढ़ाने की कोशिश में भी बच्चे उनसे मुंह फेरकर बैठे रहे।
बच्चों का कहना है—शिक्षक रोज नशे में आते हैं। इस पर प्रधान पाठक ने पत्रकारों के सामने ही उन्हें डांटना शुरू कर दिया।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश कुमार पटेल ने केवल जांच का भरोसा दिया।
तेतलपारा ही नहीं, मैनपुर ब्लॉक के 40–45 स्कूलों की हालत ऐसी ही है। कहीं बच्चे तबेलों में पढ़ रहे हैं, तो कहीं पंचायत भवनों में। स्मार्ट एजुकेशन और नशा मुक्ति अभियान बस कागजों में सीमित हैं।
सवाल यह है—क्या नशे में डूबा शिक्षक बच्चों का भविष्य बना सकता है, या फिर विभाग सिर्फ जांच का नाम लेकर जिम्मेदारी से बचता रहेगा?
BYTE 1: महेश नागेश, अध्यक्ष शाला प्रबंधन समिति
BYTE 2: एस के शुक्ला, डीएमसी गरियाबंद
BYTE 3: जगजीत सिंह धीर, जिला शिक्षा अधिकारी