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“सरहद तक पहुँची राखी की डोर – कोरिया में चला ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र'”

स्लग: एक राखी, एक चिट्ठी और एक चुटकी मिट्टी – कोरिया से सीमा पर सैनिकों के नाम ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र’

शशिकांत सनसनी कोरिया छत्तीसगढ़

 

 

 

“रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक भावना है – जो सीमा पर तैनात उन सैनिकों तक भी पहुँचती है, जो अपनों से दूर रहकर देश की रक्षा में तैनात हैं। कोरिया ज़िले के बैकुंठपुर में आज इस भावना को साकार किया गया ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र’ के ज़रिए, जहां स्कूली छात्राओं और महिलाओं ने राखियों, चिट्ठियों और देश की मिट्टी के जरिए सैनिकों को सम्मान और स्नेह भेजा।”

कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर आज देशभक्ति और भावनाओं की अनूठी मिसाल बना। ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान के अंतर्गत स्थानीय छात्राएं, महिलाएं और पूर्व सैनिक एकजुट होकर इस विशेष आयोजन का हिस्सा बने।

पूर्व सैनिकों का पारंपरिक आरती और तिलक से स्वागत किया गया, उनकी कलाई पर राखी बांधी गई और उनका हृदय से सम्मान किया गया।

इस अभियान के तहत न केवल पूर्व सैनिकों को राखी बाँधी गई, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के लिए एक विशेष सन्देश बॉक्स भी तैयार किया गया—जिसमें शामिल थी:

एक राखी

एक चिट्ठी, जिसमें छात्राओं व महिलाओं का स्नेह और गर्व समाहित था

और अपने वतन की एक चुटकी मिट्टी, जिससे हर सैनिक अपने गाँव, अपने देश की खुशबू महसूस कर सके।

> “किसी भी सैनिक की कलाई सूनी न रहे…” — यही भावना इस अभियान की आत्मा रही।

महेंद्र सिंह राणा, पूर्व सैनिक
“जब हमारे जैसे सैनिकों को देश याद करता है, तो वह भावना सीने में गर्व बनकर उमड़ती है। राखी पाकर ऐसा लगता है जैसे वाकई घर से कोई बहन याद कर रही है।”
मंजू जीवनानी, स्थानीय महिला
“हमारे भाई सरहद पर दिन-रात जागते हैं। यह हमारी छोटी-सी कोशिश है उन्हें बताने की कि वे अकेले नहीं हैं।”

इस छोटी-सी लेकिन गहराई से भरी पहल ने फिर एक बार यह साबित कर दिया कि हमारे सैनिक सिर्फ सरहद पर नहीं, बल्कि हर देशवासी के दिल में बसते हैं। और जब रक्षाबंधन आता है, तो कोरिया जैसे छोटे शहर से भी राखियों की डोर सरहद तक पहुँचती है—सम्मान, स्नेह और मिट्टी की सौगात लेकर।

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