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60 किमी दूरी के दो संकुलों का इकलौता समन्वयक : बीईओ के आदेश पर उठे सवाल

गरियाबंद/छुरा। विकासखंड शिक्षा कार्यालय छुरा में एक बार फिर नियमों की अनदेखी कर प्रशासनिक आदेश जारी करने का मामला सामने आया है। इस बार खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) द्वारा जारी किया गया आदेश न केवल शिक्षकीय व्यवस्थाओं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।

बीईओ कार्यालय द्वारा 15 जुलाई 2025 को जारी आदेश क्रमांक 0648/वि.ख.शि.अ./स्था./2025 के तहत, सहायक शिक्षक (एलबी) संतोष कुमार साहू, जो वर्तमान में संकुल केंद्र रुवाड में संकुल समन्वयक के पद पर कार्यरत हैं, को पाण्डुका संकुल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। यह निर्णय चौंकाने वाला इसलिये है क्योंकि दोनों संकुल केंद्रों के बीच की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। यह दूरी ना सिर्फ भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि इससे दोनों स्थानों में शिक्षकीय निगरानी और व्यवस्थापन की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।

शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी संकुल समन्वयक को केवल एक ही संकुल का प्रभार दिया जाना चाहिए, ताकि वह शालाओं की निगरानी, शैक्षणिक गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को सही ढंग से सुनिश्चित कर सके। ऐसे में एक ही शिक्षक को दो दूरस्थ संकुलों की जिम्मेदारी देना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि यह संकुलों की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ एक अनुचित प्रयोग भी प्रतीत होता है।

स्थानीय शिक्षक और अभिभावकों ने उठाये सवाल
स्थानीय शिक्षकों और लोगों का कहना है कि यह निर्णय “सेटिंग” या “मैनेजमेंट” का परिणाम हो सकता है, न कि जरूरत और योग्यता के आधार पर लिया गया फैसला। इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि क्या एक ही व्यक्ति दोनों संकुलों में समय पर उपस्थिति दर्ज करा पाएगा ? यदि नहीं, तो क्या वह दोनों स्थानों से वेतन लेगा ? यह सीधा-सीधा सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग माना जा सकता है।

कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से जांच की मांग

इस आदेश के विरुद्ध शिक्षक संगठनों ने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि ऐसे निर्णय विद्यालयों की कार्यप्रणाली, बच्चों की पढ़ाई और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं। यदि इस प्रकार की मनमानी नीतियां जारी रहीं, तो शिक्षा व्यवस्था की जड़ें कमजोर होती जाएंगी।

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