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श्री सीमेंट खनन को लेकर फिर गरमाया विरोध, महिलाओं ने संभाला मोर्चा

* श्री सीमेंट खनन को लेकर फिर गरमाया विरोध, महिलाओं ने संभाला मोर्चा…
* जनसुनवाई की सुगबुगाहट पर किसान अधिकार संघर्ष समिति की प्रेस वार्ता, बोलीं—किसानों की सहमति के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ी तो होगा व्यापक लोकतांत्रिक विरोध…

खैरागढ़(प्रदीप बोरकर)। श्री सीमेंट की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर एक बार फिर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जनसुनवाई दोबारा आयोजित होने की सुगबुगाहट के बीच किसान अधिकार संघर्ष समिति ने शुक्रवार को नवीन जिला पत्रकार संघ भवन में प्रेस वार्ता कर प्रशासन को चेतावनी दी।

समिति ने कहा कि किसानों की स्पष्ट असहमति के बावजूद यदि जनसुनवाई की नई तारीख तय कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो क्षेत्र के किसान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विरोध करेंगे। समिति की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि किसानों की जमीन, पानी, पर्यावरण और आजीविका को बचाने के लिए अपनी आपत्ति शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है।

“महिलाओं ने संभाली कमान, लुकेश्वरी बोलीं—जनसुनवाई हुई तो मातृशक्ति भी उतरेगी मैदान में”
प्रेस वार्ता में इस बार किसान अधिकार संघर्ष समिति की महिला सदस्यों ने प्रमुखता से अपनी बात रखी। अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि क्षेत्र की महिलाएं भी अब इस संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लेंगी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की इच्छा के विपरीत जनसुनवाई आयोजित की गई तो माताएं-बहनें भी आंदोलन में मजबूती से शामिल होंगी।

उन्होंने कहा कि यह केवल पुरुष किसानों का मुद्दा नहीं है, बल्कि जमीन और खेती से जुड़े हर परिवार के भविष्य का सवाल है। प्रेस वार्ता में प्रियंका जंघेल, रश्मि जंघेल, बिमला विश्वकर्मा, तिजिया बाई, दुलेश्वरी, फूलबासन बाई, सातों बाई, ज्ञानिक जंघेल सहित अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।

“आधिकारिक पत्र नहीं मिला, लेकिन गांवों में कंपनी की गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता”
पत्रकारों के सवाल पर समिति की महिला प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रशासन की ओर से जनसुनवाई की नई तारीख से संबंधित कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिला है। हालांकि उनका कहना है कि कुछ गांवों में कंपनी से जुड़े लोगों द्वारा जनसुनवाई होने की बात कहकर संपर्क किए जाने की जानकारी मिली है। इसी के चलते समिति ने पहले से अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी समझा। समिति का कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं आती, तब तक वे किसी तारीख की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी भी नई प्रक्रिया की स्थिति में किसानों को संगठित कर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।

“जमीन खरीदी पर भी सवाल, समिति बोली—पुराने सौदों की रजिस्ट्री की जानकारी मिली”
श्री सीमेंट के नाम जमीन की लगातार रजिस्ट्री होने के सवाल पर समिति ने कहा कि वर्तमान में नई जमीन खरीद के संबंध में उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ किसानों ने पूर्व में जमीन का सौदा कर राशि प्राप्त कर ली थी और अब उन्हीं पुराने सौदों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। समिति ने कहा कि जमीन से जुड़े प्रत्येक सौदे की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और यदि किसी किसान पर दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव डालकर जमीन लेने की शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

“किसानों की दो टूक—जमीन, जल और आजीविका के सवाल पर पीछे नहीं हटेंगे”
किसान अधिकार संघर्ष समिति ने कलेक्टर को दिए आवेदन में प्रस्तावित श्री सीमेंट चूना पत्थर खनन परियोजना की जनसुनवाई तत्काल रोकने तथा परियोजना को निरस्त करने की मांग दोहराई है। समिति ने कहा कि दनिया-अतरिया-हनईबन-उदयपुर और आसपास का क्षेत्र कृषि प्रधान है, जहां खेती, जलस्रोत, भूजल, पशुपालन और ग्रामीणों की आजीविका एक-दूसरे से जुड़ी है। खनन, ब्लास्टिंग, क्रशिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से संभावित प्रभाव को लेकर किसानों में चिंता है। समिति ने प्रशासन से जमीन खरीद अथवा अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक, किसानों पर किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन की शिकायतों की जांच और उनकी आपत्तियों को प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की है।

“प्रशासन से टकराव नहीं, संवाद की मांग—लेकिन जनसुनवाई थोपने पर आंदोलन तेज करने का ऐलान”
समिति ने कहा कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की आजीविका और उपजाऊ जमीन की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता। समिति का कहना है कि प्रशासन को नई जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले क्षेत्र के किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से सुनना चाहिए। समिति ने दोहराया कि वह पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसानों की स्पष्ट असहमति के बावजूद जनसुनवाई थोपने का प्रयास किया गया तो क्षेत्र की मातृशक्ति, किसान और ग्रामीण मिलकर व्यापक लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराएंगे।

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