अंधेरे में पोंडी: रात 2 से 3 के बीच चोरों का तांडव, पुलिस चौकी के नाक के नीचे असुरक्षित ग्रामीण
बिजली के खंभों से तांबे के तार पार; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, जनता बोली- “अब खुद ही करनी होगी सुरक्षा”
पोंडी बचरा। विकास की दावों के बीच पोंडी बचरा क्षेत्र से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। जहां एक ओर सरकार क्षेत्र को संवारने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर पोड़ी बचरा चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रात के सन्नाटे में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तर्ज पर चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
रात 2 से 3 बजे: चोरों का ‘गोल्डन ऑवर’
विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, चोरों ने रात के 2 बजे से 3 बजे के बीच के समय को अपना निशाना बनाया है। यह वह समय होता है जब गहरी नींद का फायदा उठाकर अपराधी बेखौफ होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। पोंडी के कई स्थानों से बिजली के खंभों से जुड़े कीमती तांबे के तारों की चोरी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। तांबे की चोरी न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान है, बल्कि इससे क्षेत्र में ब्लैकआउट और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी मंडरा रहा है।
चौकी की चुप्पी और जनता का टूटता भरोसा
हैरानी की बात यह है कि पोड़ी बचरा चौकी की मौजूदगी के बावजूद अपराधियों में कानून का कोई भय नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासियों का दर्द छलक उठा है— “हमें कार्रवाई की कोई उम्मीद नहीं है।” यह वाक्य प्रशासन के लिए एक जोरदार तमाचा है। जब जनता को पुलिस से न्याय की उम्मीद खत्म हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि क्षेत्र में ‘जंगलराज’ दस्तक दे रहा है।
क्या होगा पोंडी का? सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल
ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर पोंडी का भविष्य क्या होगा?
क्या पुलिस की गश्त केवल कागजों तक सीमित है?
क्या चोरों को किसी सफेदपोश या विभाग के ही किसी व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है?
बिजली विभाग के उपकरणों की सुरक्षा के लिए विभाग सो रहा है या गहरी नींद में है?
सावधान रहें! सुरक्षा आपके हाथ में
प्रशासन की सुस्ती को देखते हुए अब क्षेत्रवासियों ने एक-दूसरे को सचेत करना शुरू कर दिया है। पोंडी की गलियों में अब डर का साया है। लोगों का कहना है कि यह गिरोह कहीं भी, कभी भी और कुछ भी कर सकता है। जनता से अपील की जा रही है कि:
अपने घरों के बाहर रोशनी रखें।
रात में संदिग्ध व्यक्तियों या वाहनों को देखने पर शोर मचाएं।
मोहल्ला समितियों के माध्यम से खुद की ‘चौकीदारी’ शुरू करें।
संपादकीय टिप्पणी:
पुलिस प्रशासन को यह समझना होगा कि उनकी निष्क्रियता ही अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है। यदि जल्द ही तांबा चोरों के इस गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ और रात की गश्त नहीं बढ़ाई गई, तो जनता का गुस्सा फूट सकता है। पोंडी बचरा चौकी को अपनी कार्यशैली पर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।