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पाटन नगर पंचायत का गौठान बना गौसेवा की मिसाल- अध्यक्ष योगेश निक्की भाले

पाटन नगर पंचायत का गौठान बना गौसेवा की मिसाल, 390 से अधिक गोवंश की हो रही नियमित देखभाल
गौसेवा के साथ किसानों को राहत, चारा-पानी, स्वच्छता और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था

पाटन। नगर पंचायत पाटन द्वारा संचालित गौठान इन दिनों गौसेवा, गोवंश संरक्षण, स्वच्छता और किसान हित की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल के रूप में सामने आया है। नगर पंचायत अध्यक्ष योगेश निक्की भाले की पहल एवं मार्गदर्शन में संचालित इस गौठान में वर्तमान में 390 से अधिक गायों एवं गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। यहां गोवंश के लिए नियमित चारा-पानी, साफ-सफाई, चराने की व्यवस्था तथा उनकी सुरक्षा और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गौठान में गोवंश की देखभाल के लिए नगर पंचायत द्वारा दस कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी प्रतिदिन गायों को चराने के लिए ले जाने के साथ गौठान परिसर की साफ-सफाई, चारा-पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नगर पंचायत का प्रयास है कि गौठान में रहने वाले गोवंश को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

पाच गाय दे रहीं दूध
गौठान की एक विशेषता यह भी है कि यहां मौजूद गोवंश में से पाच गाय वर्तमान में दूध दे रही हैं। इससे गौठान में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और भविष्य में गोवंश आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। नगर पंचायत द्वारा आने वाले समय में गौठान को और अधिक व्यवस्थित एवं उपयोगी बनाने के साथ उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में कार्य करने की योजना है।

किसानों को मिल रही राहत
गौठान का एक प्रमुख उद्देश्य आवारा एवं निराश्रित गोवंश को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। खुले में घूमने वाले मवेशियों के कारण कई बार किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ खेतों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त मेहनत भी करनी पड़ती है।

गौठान में गोवंश को सुरक्षित रखने से खेतों में आवारा पशुओं के पहुंचने की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है। किसान अपनी फसलों की बेहतर देखभाल कर पा रहे हैं और कृषि कार्यों में होने वाली अनावश्यक परेशानी एवं नुकसान को कम किया जा रहा है। इस तरह पाटन का गौठान केवल गोवंश के लिए आश्रय स्थल नहीं, बल्कि गौसेवा, पशु संरक्षण, स्वच्छता और किसान हित को एक साथ जोड़ने वाली पहल के रूप में विकसित हो रहा है।

नियमित चराई और स्वच्छता पर जोर
गोवंश के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित रूप से चराने के लिए बाहर ले जाया जाता है, जिससे उन्हें खुले वातावरण में विचरण करने का अवसर मिलता है। वहीं गौठान परिसर की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

390 से अधिक गोवंश की देखभाल एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए कर्मचारियों की नियमित निगरानी, समय पर चारा-पानी और परिसर की साफ-सफाई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नगर पंचायत द्वारा उपलब्ध व्यवस्थाओं को आवश्यकता के अनुसार लगातार मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदेश में सबसे अधिक गोवंश होने का दावा
नगर पंचायत अध्यक्ष योगेश निक्की भाले के अनुसार, गौठान में 390 से अधिक गोवंश का होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उनका कहना है कि उनकी जानकारी के अनुसार प्रदेश के अन्य गौठानों की तुलना में इतनी बड़ी संख्या में गोवंश को एक साथ रखने और उनकी नियमित देखभाल करने का उदाहरण पाटन में देखने को मिल रहा है।

योगेश निक्की भाले ने कहा, “गौसेवा हमारे लिए केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का विषय है। पाटन के गौठान में 390 से अधिक गोवंश की देखभाल की जा रही है। हमारा प्रयास है कि यहां रहने वाली प्रत्येक गाय को सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त चारा-पानी और बेहतर देखभाल मिले। इसके लिए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है, जो नियमित रूप से गायों को चराने ले जाते हैं और गौठान की साफ-सफाई का कार्य भी करते हैं।”

उन्होंने कहा कि गौठान में गोवंश को सुरक्षित रखने से किसानों को भी राहत मिल रही है। खेतों में आवारा पशुओं के पहुंचने की समस्या कम होने से किसान बिना बाधा अपनी फसलों की देखभाल कर पा रहे हैं।

अध्यक्ष भाले ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गौठान को ऐसी व्यवस्था के रूप में विकसित करना है जहां गोवंश की अच्छी तरह देखभाल हो और किसानों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। गौसेवा के साथ स्वच्छता, पशु संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

नगर पंचायत द्वारा भविष्य में गौठान को और अधिक व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए गोवंश आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

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