*➡️ नीचे से ऊपर तक गहरी पकड़ जनता से सीधा जुड़ाव और संगठन को गति देने की क्षमता बनी कोठारी की ताकत*
*➡️ दीपक साहू*
*राजनांदगांव।*
राजनांदगांव जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की आहट तेज़ हो गई है। पार्टी आलाकमान अगले एक-दो दिनों में नया जिलाध्यक्ष घोषित कर सकता है और सूत्रों के मुताबिक़ इस बार भी पदम सिंह कोठारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। लंबे संगठनात्मक अनुभव, ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से गहरे जुड़ाव और सशक्त नेतृत्व क्षमता को देखते हुए कोठारी को एक बार फिर ग्रामीण कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की पूरी संभावना बन गई है।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व की नीति इस बार भी भूमिपुत्र को प्राथमिकता देने की है। संगठन में स्थानीय चेहरों की पकड़ को मज़बूत करने की इस नीति के तहत कोठारी का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे आगे है। वे न केवल एक सशक्त संगठनकर्ता हैं बल्कि ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में कोठारी ने कांग्रेस के सिद्धांतों और विचारधारा को गाँव-गाँव तक पहुँचाया। उनकी नेतृत्व शैली में कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने का जज़्बा और हर स्तर पर समन्वय की क्षमता देखने को मिली। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में संगठन ने नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त की थी। पदम सिंह कोठारी की संगठनात्मक क्षमता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के मार्गदर्शन में आईसीसी (कोऑर्डिनेटर) समन्वयक जैसे अहम पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी जिसे उन्होंने बख़ूबी निभाया। इस अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सशक्त संगठनात्मक चेहरा बना दिया है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि आलाकमान को कोठारी की कार्यशैली, अनुशासन और जनता से निकटता पर पूरा भरोसा है। यही कारण है कि उन्हें दोबारा कमान सौंपने की चर्चा अब तेज़ी से गति पकड़ चुकी है। कोठारी का सबसे बड़ा बल है उनकी संगठन में गहरी जड़ें। उन्होंने अपने कार्यकाल में वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक के साथ सीधा संवाद कायम किया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जो संगठन और जनता दोनों के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। राजनांदगांव के ग्रामीण अंचलों में पदम सिंह कोठारी का नाम एक कांग्रेस के जमीनी सिपाही के रूप में लिया जाता है। उनका कार्यशैली हमेशा परिणाम-उन्मुख रही है चाहे बात जनआंदोलनों की हो सदस्यता अभियान की या फिर संगठन विस्तार की। अगर पदम सिंह कोठारी को दोबारा ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनाया जाता है तो यह कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम होगा। साथ ही सत्ता पक्ष भाजपा के लिए भी यह चिंता का विषय बन सकता है। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है क्योंकि कोठारी के नेतृत्व में कांग्रेस पहले भी कई बार भाजपा के गढ़ों में सेंध लगाने में सफल रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोठारी की वापसी से ग्रामीण कांग्रेस में एकता और उत्साह का नया दौर शुरू हो सकता है। संगठनात्मक रूप से मज़बूत टीम बनाकर वे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं। पार्टी के अंदरूनी हलकों में चर्चा है कि यदि कोठारी को दोबारा अध्यक्ष बनाया गया तो कांग्रेस की ग्रामीण इकाई पंजा की मजबूत मुट्ठी बनकर उभरेगी। इससे न केवल कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा बल्कि जनता के बीच भी कांग्रेस की पकड़ और गहरी हो जाएगी।
राजनांदगांव से दीपक साहू की रिपोर्ट