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बोर खनन के नाम पर जरूरतमंदों से खुलेआम लूट, राज्य सरकार को भी करोड़ों का नुकसान

* बोर खनन के नाम पर जरूरतमंद लोगों से खुलेआम लूट,बिना पक्का बिल के वसूली से राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान, संबंधित विभाग मौन?…
* शहरों में बोर खनन का खेल: नियम ताक पर, आम लोग हो रहे ठगी के शिकार,मनमाना खनन…
* टैक्स चोरी बना बोर मशीन संचालकों की काली कमाई, ठगी रोकने सरकार से सख्त कार्रवाई की अपील…

राजनांदगांव (संतोष देवांगन) : शहरी क्षेत्रों में इन दिनों बोर खनन के नाम पर आम लोगों से मनमानी वसूली और नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आ रहा है। बोर खनन करने वाले कई संचालक बिना पक्का बिल दिए और तय मानकों का पालन किए बिना ही ग्राहकों से भारी रकम वसूल रहे हैं, जिससे एक ओर आम नागरिकों की जेब कट रही है तो दूसरी ओर सरकार को भी लाखों-करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

छोटी मशीन और बड़ी मशीन बताकर जरूरतमंदो से लुट:
जानकारी के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपने घर, प्लॉट या अन्य स्थान पर बोर खनन कराने के लिए संपर्क करता है, तो खनन करने वाले पहले यह पूछते हैं कि बोर संकरी गली में करना है या खुले स्थान पर। यदि ग्राहक खुले स्थान या कॉलोनी में बोर करवाने की बात करता है, तो खनन करने वाले बड़ी मशीन लगाने की बात कहते हैं। इसके बाद अत्यधिक दबाव वाली मशीन से जमीन में 400 से 900 फीट तक बोर खनन कर दिया जाता है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बोर बिचौलिया सक्रिय:
वही छत्तीसगढ़ में खुद का बोर खनन मशीन बताने वाले बिचौलिए भी आंध्रा से आकर बोर खनन करने वाले को झूठा बताकर जरूरतमंद लोगों को लूटने का कार्य खुलेआम कर रहा है। खास कर भवन निर्माण करने वाले मध्यम वर्ग जरूरमंद लोग ज्यादा शिकार हो रहे हैं। जहां इस तरह से लुट का यह मामला सामने आया है जिसमें राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के अन्य शहरी क्षेत्रों के पास इलाकों, निर्माणाधीन कालोनियों में देखने को मिल सकता है।

पानी की आस में लूटते हैं बोर खनन करने वाले आम लोगों को:
वही साइट में खनन के दौरान बाहर निकलती धूल को देखकर ग्राहक को पानी मिलने की उम्मीद में और अधिक गहराई तक बोर करवाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे लागत लगातार बढ़ती जाती है और अंततः ग्राहक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं अधिकांश मामलों में बोर खनन करने वाले कोई पक्का बिल नहीं देते, जिससे टैक्स के रूप में सरकार को हजारों रुपए का नुकसान होता है।

राज्य सरकार को होगी करोड़ों रुपए का फायदा:
सूत्रों के अनुसार, यदि वर्ष 2024 से 2026 के बीच शहरों, कॉलोनियों और ग्राम पंचायतों में हुए निजी बोर खनन की गहन जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और अवैध कमाई का खुलासा हो सकता है। ऐसे में सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान की भरपाई हो सकती है।

सरकार ठगी रोकने बोर संचालकों पर कसे शिकंजा:
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बोर खनन कार्यों की जांच कराए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों व बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आम और जरूरतमंद लोग बोर खनन के नाम पर ठगी का शिकार न हों।

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