रिपोर्टर: शशिकांत सनसनी, मोहला-मानपुर
एक कमरे में तीन क्लास के बच्चे पढ़ने पर है मजबूर
प्रशासन कि लापरवाही से नहीं बन पाया स्कूल भवन
मोहला-मानपुर जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम कमकासूर में बच्चों को पढ़ाई के लिए एक ही कमरे में तीन-तीन क्लास चलानी पड़ रही हैं। कुछ कक्षाएं पंचायत भवन में लग रही हैं। वजह—पिछले कई सालों से स्कूल का भवन पूरी तरह जर्जर, और नया भवन बनाने की प्रक्रिया लापरवाही में अटकी हुई। तस्वीरें देखिए, विकास के दावों की असलियत खुद सामने आ जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार जहां विकास की नई-नई योजनाओं और शिक्षा के डिजिटल मॉडल की बातें करती है, वहीं वनांचल क्षेत्र की हकीकत कुछ और है। कोराना काल में यहां टीवी और डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करवाई गई थी, जिससे यह इलाका राज्य में शिक्षा के नवाचार के लिए जाना गया। यहां के बच्चे प्रतिभा में किसी से कम नहीं—चाहे पढ़ाई हो, खेल हो या सांस्कृतिक कार्यक्रम। लेकिन विकास के वादे यहां कागजों से बाहर निकल नहीं पाए।
मानपुर ब्लॉक के अंतिम छोर पर, उत्तर बस्तर की सीमा से लगे ग्राम पंचायत कमकासूर के शासकीय माध्यमिक शाला की इमारत सालों से खस्ताहाल है। छत टूटी हुई है, दीवारें जर्जर हैं, जिसके कारण कक्षाओं में बैठना बच्चों के लिए खतरे से खाली नहीं।
ग्राम पंचायत के सरपंच कारण बोगा के मुताबिक, सत्र 2021-22 में भवन मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन ठेकेदार ने काम करने से मना कर दिया और पैसा वापस कर दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष, फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी, शिव शंकर सिंह गौड़ ने निरीक्षण में पाया कि बच्चों और शिक्षकों का मनोबल ऊंचा है, लेकिन बैठने की व्यवस्था और सुरक्षित भवन न होने से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
खनिज और वन संपदा से भरपूर इस इलाके से निकटतम हाई स्कूल खड़गाम लगभग 12 किलोमीटर दूर है, लेकिन आने-जाने की कोई यातायात सुविधा नहीं। बच्चे रोज पैदल लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।
पूर्व विधायक इंदर शाह मंडावी के दो बार प्रतिनिधित्व करने के बावजूद इस क्षेत्र में शिक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत यहां स्थानीय स्वशासन लागू है, फिर भी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रखकर, खनिज संपदा पर बाहरी कब्जा बनाए रखने की सुनियोजित रणनीति चल रही है।