5 बिंदुओं में रखी मांगे, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ पेंशनर समाज द्वारा अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर शुक्रवार नगर के गांधी मैदान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर पेंशनरों में गहरा आक्रोश देखने को मिला है।
गरियाबंद में आयोजित इस धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पेंशनर शामिल हुये। पेंशनरों ने कहा कि, पेंशनरी भुगतानों के लिये सहमति की प्रक्रिया के अनुसार राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) का बहाना लेकर छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा पेंशनरों के साथ 26 वर्षों से अन्याय किया जा रहा है। जिसमें दोनो राज्य शासन म.प्र. एवं छ.ग.की पेंशनरी भुगतान के लिये एक-दूसरे की सहमति ली जाती है,जबकि राज्य पुनगर्ठन अधिनियम 2000 के तहत झारखण्ड, उत्तरप्रदेश तथा बिहार राज्य पुनगर्ठन अधिनियम 2000 के तहत उत्तरप्रदेश में उत्तराखंड तथा बिहार से अलग झारखंड राज्य निर्माण किया गया है, वहाँ यह प्रथा नहीं है।
उनके द्वारा अपने राज्य के पेंशनरों को स्वतंत्रातापूर्वक भुगतान किया जाता है। जबकि धारा 49 (6) के तहत मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में पेंशनरों के एरियर एवं राहत पेंशन हेतु सहमति लेने की आवश्यकता ही नहीं है फिर भी सहमति लेने की प्रक्रिया अपनाकर दोनो राज्यों के लगभग 5 लाख पेंशनरों के साथ 26 वर्षों से अन्याय किया जा रहा है। इस कुप्रथा को समाप्त कर दोनो राज्यों के पेंशनरों को पेंशनरी मुगतान हेतु दोनो राज्यों के सहमति वाली प्रथा समाप्त करें।
पेंशनरों ने आरोप लगाया कि राज्य पुनर्गठन के बाद से पिछले 26 वर्षों से उनके साथ अन्याय किया जा रहा है।
उन्होंने शासन के समक्ष अपनी 5 मुख्य मांगें रखी है इनमें –
1- पेंशन भुगतान के लिये दोनों राज्यों की सहमति की प्रक्रिया को समाप्त की जाये।
2 – महंगाई राहत पेंशन 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू की जाये।
3 – छठवें वेतनमान के तहत 32 माह का एरियर भुगतान किया जाये।
4 – सातवें वेतनमान के अनुसार 27 माह का एरियर दिया जाये।
5 – पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और दवाई खर्च का भुगतान किया जाये।
इस दौरान पेंशनर समाज जिला अध्यक्ष एन.के.वर्मा,सत्यप्रकाश मानिकपुरी, महेश्वर प्रसाद दुबे, बोधनलाल कांशी,गोविंद उइके,भागीरथी निषाद सहित बड़ी संख्या में पेंशनर समाज के सदस्य उपस्थित थे।
