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11 वर्षों की सेवा के बाद भी नियमितीकरण नहीं, विद्यामितान 13 जुलाई को करेंगे विधानसभा घेराव

* 11 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था संभालने वाले विद्यामितान अब सड़क पर, सम्मान और नियमितीकरण की मांग को लेकर 13 जुलाई को दुर्ग से विधानसभा तक पैदल मार्च…
11 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था संभालने वाले विद्यामितान अब सड़क पर, 13 जुलाई को दुर्ग से विधानसभा तक पैदल मार्च

रायपुर/दुर्ग, 11 जुलाई। पिछले 11 वर्षों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अब अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ ने 13 जुलाई को दुर्ग से विधानसभा, नया रायपुर तक विशाल पैदल यात्रा एवं विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। संघ ने इसकी विधिवत सूचना प्रशासन को भी सौंप दी है।

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल शिक्षकों का आंदोलन नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की आवाज़ है जिन्होंने वर्षों तक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अपने श्रम, समर्पण और त्याग से संभाला, लेकिन आज भी नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

संघ के अनुसार, प्रदेश के वनांचल, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी के दौरान विद्यामितानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी सेवाएं दीं। सरगुजा और बस्तर संभाग के कई दुर्गम विद्यालयों में वर्षों तक शिक्षा का दीप जलाने वाले इन्हीं शिक्षकों के प्रयासों से अनेक विद्यार्थी आज डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी बन चुके हैं।

संघ ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकारों की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा को लेकर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इस दौरान कई विद्यामितान आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझते रहे, जबकि कुछ साथी न्याय की प्रतीक्षा करते हुए दुनिया से भी विदा हो गए।

प्रांतीय अतिथि शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि 13 जुलाई का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक होगा। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांगों और पीड़ा को मजबूती से पहुंचाना है।

संघ ने सरकार से वर्षों से कार्यरत विद्यामितानों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, 12 माह की सेवा सुरक्षा तथा सम्मानजनक सेवा शर्तों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने वर्षों के श्रम और समर्पण का न्यायपूर्ण सम्मान चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि शिक्षा का भविष्य गढ़ने वाले शिक्षक ही असुरक्षित रहेंगे, तो शिक्षा व्यवस्था की मजबूती पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होगा।
* मुख्य कार्यक्रम ; तिथि: 13 जुलाई 2026-समय: प्रातः 11:00 बजे *
मार्ग: दुर्ग से पैदल यात्रा प्रारंभ होकर विधानसभा, नया रायपुर तक
आयोजक: प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ, छत्तीसगढ़
संघ ने अपने आंदोलन का संदेश देते हुए कहा है कि “11 वर्षों का इंतजार अब और नहीं, अब सम्मान, सुरक्षा और नियमितीकरण चाहिए।”

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