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प्रकृति स्वयं करती है भोलेनाथ का अभिषेक: MCB की नई पहचान बना जटाशंकर धाम

प्रकृति स्वयं करती है भोलेनाथ का अभिषेक: MCB की नई पहचान बना जटाशंकर धाम

​आस्था, इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अनूठा संगम; सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है अपार भीड़

 मनेंद्रगढ़ ; घने जंगलों की नीरवता, ऊंची पहाड़ियों की गोद, करीब 730 सीढ़ियों की रोमांचक यात्रा और प्राकृतिक गुफा में विराजमान ‘स्वयंभू शिवलिंग’… यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में स्थित ‘जटाशंकर धाम’ का अलौकिक दृश्य है। यहाँ की गुफा में चट्टानों से निरंतर टपकती जलधारा देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं प्रकृति ही भगवान भोलेनाथ का अनवरत जलाभिषेक कर रही हो।

​https://youtu.be/f1QDaq_bnjs

जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से लगभग 54 किलोमीटर और बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम सोनहरी से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जटाशंकर धाम आज आस्था, संस्कृति और प्राकृतिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

​730 सीढ़ियाँ चढ़कर आध्यात्मिक अनुभूति

​पहाड़ी की तलहटी में बसी इस प्राकृतिक गुफा तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को घने जंगलों के बीच से होकर करीब 730 सीढ़ियों की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। यह यात्रा भले ही शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन चारों ओर छाई हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और वन क्षेत्र का शांत वातावरण श्रद्धालुओं की थकान मिटाकर उन्हें अद्भुत आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

​जटाओं सी चट्टानें और निरंतर जलाभिषेक

​जटाशंकर धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग है। गुफा के भीतर बनी प्राकृतिक चट्टानी संरचनाएं भगवान शिव की विशाल जटाओं जैसी दिखाई देती हैं। इन्हीं प्राकृतिक जटाओं से पानी की सूक्ष्म धाराएं अनवरत बहती हुई सीधे शिवलिंग पर गिरती हैं। चट्टानों से जल टपकने की इसी अलौकिक विशेषता के कारण इस पवित्र स्थल का नाम ‘जटाशंकर धाम’ पड़ा।

​प्राचीन इतिहास और बैगा समुदाय की जनश्रुतियां

​स्थानिय मान्यताओं और पुजारियों के अनुसार, इस धाम का इतिहास बेहद प्राचीन है। शुरुआत में इस गुफा की पूजा-अर्चना स्थानीय बैगा समुदाय द्वारा की जाती थी।

लोकमान्यता: जनश्रुति है कि भगवान भोलेनाथ ने स्वयं बैगा समाज के लोगों को स्वप्न में आकर इस पवित्र स्थल का संकेत दिया था, जिसके बाद से यहाँ निरंतर पूजा-पाठ की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य लोकविश्वास यह भी है कि भगवान शिव इस स्थान पर अपना कमंडल रखते थे, जो उनकी कृपा से स्वयं दूध से भर जाता था।

 

​जैव विविधता और प्राकृतिक पर्यटन का खजाना

​धार्मिक महत्व के साथ-साथ जटाशंकर धाम पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद समृद्ध है। विशाल पहाड़ियाँ, घने वन और प्राकृतिक जलस्रोत इसे प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए पसंदीदा स्थान बनाते हैं। गुफा के आसपास के वन क्षेत्र में विविध प्रकार की वनस्पतियाँ और वन्यजीव पाए जाते हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाते हैं।

​सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

​हर वर्ष सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है। दूर-दूर से भक्त यहाँ पहुँचकर भगवान शिव को बेलपत्र, दूध और गंगाजल अर्पित करते हैं। दुर्गम रास्ते के बावजूद पूरे सावन यहाँ शिवभक्तों के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहता है।

​MCB जिले की पहचान और रोजगार के अवसर

​आज जटाशंकर धाम केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि MCB जिले की गौरवशाली पहचान बन चुका है। धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) में हो रही इस वृद्धि से स्थानीय स्तर पर रोजगार, दुकानदारों और आजीविका के नए साधनों को बढ़ावा मिल रहा है।

​प्रकृति की गोद में बसा यह धाम आस्था, रोमांच और कुदरत की खूबसूरती का ऐसा अनूठा संगम है, जो यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु के मन में एक अमिट छाप छोड़ जाता है।

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