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बिरेझर में पेड़ों की हत्या – कंपनी का आतंक, वन विभाग मौन

रिपोर्टर – शशिकांत सनसनी राजनांदगाँव छत्तीसगढ़

राजनांदगांव। विकासखंड के ग्राम मगरलोटा के आश्रित ग्राम बिरेझर में हरे-भरे सैकड़ों पेड़ों को जेसीबी से बेरहमी से काट डाला गया। यह पेड़ों का कत्लेआम वृंदा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा अंजाम दिया गया, जबकि वन विभाग से न अनुमति ली गई, न ग्राम पंचायत से कोई औपचारिक जानकारी साझा की गई।

जहां एक ओर सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसी हरियाली बचाओ मुहिम चला रही है, वहीं निजी कंपनियों को जंगलों की खुली लूट की छूट देना सरकार की नीति पर सवाल खड़ा करता है।

ग्रामीणों का आरोप:
ग्राम पंचायत के उपसरपंच नेमचंद साहू सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पूर्व सड़क किनारे वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण किया गया था। अब ये पेड़ फल-फूल कर बड़े हो चुके थे और पर्यावरण के लिए अमूल्य थे। मगर कंपनी ने पंचायत से एनओसी तक नहीं ली और रात के अंधेरे में जेसीबी चलवा दी।

ग्रामीणों का विरोध:
कटाई का विरोध करने पर ग्रामीणों ने पेड़ों को बचाने की कोशिश की, परंतु तब तक सैकड़ों पेड़ जमींदोज हो चुके थे। यह दृश्य देखकर गांववाले स्तब्ध रह गए।

प्रशासन मौन क्यों?
जब एक पेड़ काटने के लिए भी प्रशासन से अनुमति, मुआवजा और वैध प्रक्रिया जरूरी होती है, तब सैकड़ों पेड़ों की निर्मम कटाई पर वन विभाग की खामोशी कई सवाल खड़े करती है।
क्या यह भ्रष्टाचार का संकेत है या निजी कंपनियों के सामने प्रशासन की घुटने टेक देने वाली नीति?
ग्रामीणों की मांग:
शासन से कड़ी कार्रवाई, कंपनी पर मुकदमा दर्ज, तथा पेड़ काटने के नुकसान की भरपाई की मांग की गई है।

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