▶️ राजनांदगांव से दीपक साहू की रिपोर्ट : नवरात्र पर्व के पंचमी पर विशेष …
राजनांदगांव : राजनांदगांव शिक्षा विभाग में पदस्थ एसीपी सतीश ब्यौहरे बताते हैं कि उनके पिता स्व. विश्वनाथ प्रसाद ब्यौहरे मां बम्लेश्वरी के अनन्य भक्त थे, जो हर साल नवरात्र में पंचमी के दिन माता का दर्शन करने डोंगरगढ़ पहुंचते थे।
श्री ब्योहारे ने बताया कि एक बार 1994-95 में उनकी तबीयत बिगड़ी, इसके बाद भी जैसे तैसे वे डोंगरगढ़ पहुंचे, वहां से आने के बाद उनकी तबीयत ज्यादा ही खराब हो गई। इसी बीच मां बम्लेश्वरी उनके स्वप्न में आई और कहा तुझे मेरे पास आने की जरूत नहीं, मैं तेरे घर नीम पेड़ के आसपास पत्थर रूप में आ चुकी हूं, मुझे ढूंढ लो जब इच्छा हो मंदिर बनवा लेना।
सतीश ब्यौहरे ने बताया कि मूर्ति की साइज में बहुत धीरे-धीरे बढ़ोतरी भी हो रही है। इसका भी प्रमाण मिलता है। वे बताते हैं कि एक बार यहां हवन कुंड को प्रणाम करते हुए एक बच्ची कुंड में गिर गई, लेकिन जब उसे निकाले तो कुछ भी नहीं हुआ था। यह एक चमत्कार था। उस पत्थर को सभी ने उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह हिला भी नहीं, इसके बाद पिताजी जैसे ही हाथ लगाए पत्थर में विराजित मां बम्लेश्वरी उनके हाथों में आ गई।
कुछ दिनों तक नीम के नीचे रखकर पूजा-अर्चना करते रहे, फिर मंदिर बनाकर मां की 9 दिनों तक पंडितों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कराए। फिर 1996 में नवरात्रि के सप्तमी के दिन ही उनका स्वर्ग लोक गमन हो गया। ब्यौहरे निवास ग्राम मोहला के पोस्ट आफिस के सामने है, जहां अब माता की भव्य मंदिर बन चुकी है। यहां नवरात्र में विधि विधान से घर का ज्योति कलश स्थापित किया जाता है। मंदिर में पूजा अचर्ना पंडित श्याम लाल नेताम द्वारा की जाती है।
