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झेरिया पानी के लाइसेंस नंबर के नाम पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी, अधिकारी राज में लूट की नई कहानी, दो एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रिंट करवाकर करोड़ों रूपये का कर रहे बंदरबांट

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़ 

झेरिया पानी के लाइसेंस नंबर के नाम पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी, अधिकारी राज में लूट की नई कहानी, दो एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रिंट करवाकर करोड़ों रूपये का कर रहे बंदरबांट

रायपुर _ पानी जिसे जीवन का अमूल्य अंग माना जाता है और मानव शरीर के लिए भी पानी सबसे ज़रूरी तत्व होता है। आज कल के ज़माने में पानी बिक्री का एक नया ट्रेंड चल रहा है जिसे बॉटलों और पाउचों में भरकर भेजा जा रहा है। इस युग में बिसलेरी, किनले, अक्वा जैसे कई ब्रांड मार्केट में चल रहे हैं। इसी को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने भी इस फील्ड में खुद को उतार लिया है। देशी मॉडल के लिए ये सोच अच्छी भी है इसकी सराहना भी होनी चाहिए। लेकिन शासन की इसी सराहनीय प्रयास में अधिकारी ही खुद पलीता लगाने पर उतारू हो गए हैं। कहावत है कि “गांव बसा नहीं कि लुटेरे पहुंच गए”, शासन और मुख्यमंत्री के इसी प्रयास में जिला पंचायत रायपुर के अधिकारी ही लूट की नई कहानी लिख रहे हैं और खुद की जिम्मेदारी को स्वीकार भी कर रहें हैं। आखिरकार अधिकारियों में इतना साहस कहां से आ रहा है कि चोरी करके भी सीनाजोरी कर रहे हैं। या फिर उन्हें छत्तीसगढ़ शासन पर पूरा भरोसा है कि हम कुछ भी करें, कार्यवाही होगी नहीं इसलिए जितना लूट सकते हो लूट हो।

छत्तीसगढ़ शासन और एनआरडीए के तत्वाधान में जिला पंचायत रायपुर के नेतृत्व में पानी बिक्री हेतु स्व सहायता समूह को कार्य दिया गया है। जिसका प्लांट नवा रायपुर के खण्डवा पचेड़ा में जल शुद्धिकरण संयंत्र में अलग से स्थान दिया गया है, जहां पर झेरिया ब्रांड नाम से पानी की बॉटलिंग और पाउच बनाया जा रहा है। झेरिया पानी के नाम से जो कार्य प्रारंभ किया गया है इसका उद्घाटन स्वयं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कर कलमों से किया गया।
झेरिया पानी की सप्लाई सभी शासकीय विभागों और बिहानों में किया जा रहा है। जिला पंचायत के सीईओ और बीपीएम अधिकारी द्वारा झेरिया पानी की मॉनिटरिंग की जा रही है।
झेरिया पानी के बॉटल में एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर में कूटरचित कर दो स्टीकर बनाया गया है। एक स्टीकर में 1052501 60000305 वैध एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और दूसरे में कूटरचित
1062501 60000306 एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रिंट कर पानी की बॉटलिंग की जा रही है। कूटरचित प्रिंट स्टीकर के बॉटल के दामों में भी अंतर देखा गया है।
इस प्रकरण में जिला पंचायत रायपुर के बीपीआई एम विक्रम लोधी और सीईओ कुमार बिश्वरंजन ने मात्र प्रिंटिंग त्रुटि कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है मगर सवाल इस बात का है कि जब इतनी इतनी बड़ी मात्रा में कूटरचित एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर 1062501 60000306 की बॉटलों की बिक्री की गई है तो उसका हिसाब किताब कैसे संधारण किया गया होगा क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार तो कूटरचित एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर के बॉटलों की कोई गणना हो ही नहीं सकती है।
दोनों एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर के बॉटलों की गुणवत्ता और दामों में भी अंतर देखा जा सकता है। एक लीटर के एक बॉटल के दाम बीस रुपए और दूसरे वैध एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर के बॉटल का दाम तीस रुपए रखा गया है। दोनों के एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर अलग अलग है। मतलब साफ है कि जिला पंचायत रायपुर के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर दो एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रिंट करवाया गया है ताकि कूटरचित एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर 1062501 60000306 के बॉटलों की बिक्री कच्चे में करवा कर पूरे पैसों की बंदरबांट की जा सके। मामला सामने आने के बाद शासन प्रशासन द्वारा संलिप्त अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी या फिर अभयदान दिया जाएगा ये तो आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

वही जिला पंचायत अधिकारी का कहना है कि मामले की जानकारी आपके द्वारा मिली है, ये मात्र प्रिंटिंग त्रुटि है जिसका सुधार करने को निर्देशित कर दूंगा वही गलती को स्वीकार कर जिम्मेदारी ले रहा है

कुमार बिश्वरंजन, जिला पंचायत सीईओ रायपुर

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