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सामूहिक दवा सेवन एवं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम 27 फरवरी से 13 मार्च तक

(कृष्णा पाण्डेय की रिपोर्ट ) गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : राष्ट्रीय वेक्ट्रर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत फाईलेरिया (हाथीपांव) संक्रमण से बचाव हेतु जिले में 27 फरवरी से 13 मार्च 2025 तक फाईलेरिया रोधी दवा पूरे योग्य जनसमूह को खिलाया जायेगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बताया की 27 फरवरी से 2 मार्च तक स्कूल, कालेज, आंगनबाडी केंन्द्र तथा स्वास्थ्य केन्द्रों में बूथ लगाकर और 3 मार्च से 10 मार्च तक दवा प्रशासक द्वारा घर-घर जाकर फाईलेरिया रोधी दवा खिलाई जायेगी।

छुटे हुये योग्य व्यक्तियों को 11 मार्च से 13 मार्च तक दवा का सेवन कराया जायेगा। जनसमूहों को दवा खिलाने हेतु जिले में कुल 708 दल कार्यरत रहेंगे। इनकी निगरानी हेतु 140 सुपरवाईजर चयनित की गई है। इस कार्यकम के तहत् एक व्यक्ति को 3 तरह की दवाई एल्बेंडाजोल, डीईसी एवं आइवरमेक्टिन का सेवन कराया जाएगा।

इन दवाओं के सेवन से शरीर को किसी प्रकार की क्षति नही होती, यदि किसी प्रकार का विपरित प्रभाव हो तो परजीवी के मरने के कारण से होता है, इससे घबराने की जरूरत नही है। यदि किसी को किसी प्रकार की समस्या दवा सेवन पश्चात हो तो 108 एवं जिला स्तरीय कंट्रोल रूम मोबाइल नंबर 9131962881 में तथा रेपिड रिस्पॉस टीम से सम्पर्क कर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों से उचित परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवायें ले सकते है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ ए.आई. मिंज ने बताया कि फाईलेरिया बीमारी का कोई कारगर ईलाज नही है। एम.डी.ए. के दौरान खिलाये जा रही ट्रिपल ड्रग थेरिपी से ही इसका बचाव सम्भव है, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नही दी जायेगी तथा इस दवा का सेवन खाली पेट में नहीं करना है। 2 से 5 वर्ष के बच्चों को केवल डीईसी एवं एल्बेंडाजोल की दवा दी जानी है। आइवरमेक्टिन दवा हेतु आयु 5 वर्ष से अधिक एवं ऊंचाई 90 सेंटीमीटर होना अनिवार्य है। डॉक्टर मिंज ने बताया कि स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले सप्ताह के भीतर आइवरमेक्टिन की दवा नहीं दी जानी है। 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से पीडित व्यक्तियों को दवा नही दी जानी है।

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