Site icon Chhattisgarh 24 News : Daily Hindi News, Chhattisgarh & India News

तीन साल बाद भी अधूरा मगरघटा–परसदा पुल, तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए भी ‘भूपेश बघेल’ पुल बनवाने में हुए असफल

* पाटन के लाडले विधायक माननीय श्री ‘भूपेश बघेल’ तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए भी पुल बनवाने में रहे असफल?…
* स्वीकृति मिली, टेंडर भी हुआ, फिर क्यों नहीं बना मगरघटा–परसदा पुल?, पुल नहीं बनने से अभिभावकों ने रोका बच्चों का प्रवेश..
* मगरघटा–परसदा पुल के इंतजार में ग्रामीण, शिक्षा और आवागमन दोनों प्रभावित..

अम्लेश्वर/पाटन : नगर पालिका परिषद कुम्हारी और नगर पालिका परिषद अम्लेश्वर क्षेत्र को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित मगरघटा–परसदा पुल वर्षों बाद भी निर्माण की राह देख रहा है। जुलाई 2023 में पुल निर्माण को प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं होने से क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान पाटन विधायक माननीय श्री ‘भूपेश बघेल’ के कार्यकाल में भी यह महत्वपूर्ण परियोजना साकार नहीं हो सकी और असफलता हाथ लगी जो समझ से परे है।

जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद अम्लेश्वर के वार्ड क्रमांक 15 मगरघटा की पार्षद यामिनी मनोज यादव ने पुल निर्माण में हो रही देरी को लेकर ऑनलाइन जन शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत में बताया गया है कि 20 जुलाई 2023 को पुल निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी तथा निविदा प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई थी, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं बनने से मगरघटा और परसदा के बीच आवागमन की समस्या गंभीर बनी हुई है। विशेषकर बारिश के मौसम में नाले पर बने एप्रोच मार्ग के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विद्यार्थियों और आम नागरिकों का आवागमन प्रभावित होता है। वैकल्पिक मार्ग से जाने पर करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।

पुल निर्माण में देरी का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। परसदा में हाई स्कूल की स्वीकृति मिलने के बावजूद मगरघटा के अभिभावक अपने बच्चों का वहां प्रवेश कराने से हिचक रहे हैं।

विद्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष मगरघटा के 19 विद्यार्थियों का परसदा हाई स्कूल में प्रवेश प्रस्तावित था, लेकिन केवल चार विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया। वहीं आठ विद्यार्थियों ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेकर अम्लेश्वर के हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रवेश ले लिया, जबकि सात विद्यार्थी अब तक किसी भी विद्यालय में प्रवेश नहीं ले पाए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वे उन्हें जोखिम भरे मार्ग से स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक वे परसदा हाई स्कूल में बच्चों का प्रवेश कराने के लिए तैयार नहीं होंगे। क्षेत्रवासियों ने शासन और प्रशासन से बहुप्रतीक्षित मगरघटा–परसदा पुल निर्माण कार्य को तत्काल प्रारंभ कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का मानना है कि पुल बनने से न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा में आ रही बाधाएं भी दूर होंगी। अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वर्ष 2026 में यह महत्वपूर्ण परियोजना आखिरकार धरातल पर उतर पाती है या नहीं।

Exit mobile version