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नौकरी छोड़ी-बना सरपंच, रचा इतिहास खोला “समर्पण निशुल्क कोचिंग सेंटर” राज्य शासन ने माना आदर्श

आगेसरा "समर्पण निशुल्क कोचिंग सेंटर" सरपंचा रमाकांत साहू

* नौकरी छोड़ी, सरपंच बना और रचा इतिहास — आगेसरा गांव बना प्रदेश का कोचिंग मॉडल
* रमाकांत साहू की पहल को राज्य शासन ने माना आदर्श, अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू होगी योजना
* नौकरी छोड़ी-बना सरपंच, रचा इतिहास “समर्पण निशुल्क कोचिंग सेंटर” रमाकांत साहू की पहल को राज्य शासन ने माना आदर्श

संतोष देवांगन/आगेसरा-पाटन : दुर्ग जिला के दक्षिण पाटन स्थित ग्राम पंचायत आगेसरा गांव के युवा सरपंच रमाकांत साहू ने ग्राम विकास और युवाओं के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। युवा सरपंच रमाकांत साहू ने वह कर दिखाया जो अक्सर कल्पना तक ही सीमित रह जाता है। वे फारेस्ट विभाग में 15 साल तक प्रशासनिक सेवा देने के बाद सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपने गांव में निशुल्क कोचिंग सेंटर की स्थापना की। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा, नवोदय, सैन्य भर्ती, सीधी भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लाइब्रेरी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हो रहा महत्वपूर्ण शैक्षिक केंद्र साबित: 
रमाकांत साहू ने 6 अगस्त 2025 को अपने गांव में श्रीमती कल्पना नारद साहू सभापति जिला पंचायत दुर्ग के मुख्यातिथ्य में “समर्पण निशुल्क कोचिंग सेंटर” का शुभारंभ किया। यह कोचिंग सेंटर न केवल गांव के बच्चों के लिए बल्कि आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण शैक्षिक केंद्र साबित हो रहा है।

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं पंचायतमंत्री को किया सूचित: 
कोचिंग सेंटर की स्थापना के बाद, 19 अगस्त 2025 को रमाकांत साहू ने इस पहल की जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और पंचायत मंत्री को पत्र के माध्यम से दी। उन्होंने इस पहल को राज्य स्तर पर लागू करने का सुझाव दिया और इसे आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया।    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ:
इस पहल की खास बात यह है कि यह राज्य का पहला पंचायत स्तरीय निशुल्क कोचिंग मॉडल है, जिसे अब छत्तीसगढ़ शासन ने पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों से जानकारी एकत्रित कर, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

बना चिंतन और समीक्षा का विषय:
उसी पत्र को आधार मानकर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा राज्यव्यापी योजना का प्रारूप तैयार किया गया। हालांकि, सरपंच रमाकांत साहू द्वारा शुरू की गई इस राज्यस्तरीय योजना में उनका नाम ना जुड़ना चिंतन और समीक्षा का विषय बना हुआ है। वही ग्रामीणों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया और मांग की कि राज्य शासन को इस योगदान का विधिवत सम्मान करना चाहिए।

शैक्षिक योग्यताएं और प्रशासनिक अनुभव:
वही रमाकांत साहू के पास स्नातकोत्तर, बीएड, कंप्यूटर डिप्लोमा और लाइब्रेरी साइंस की डिग्रियां हैं। वे “मंत्रालय से लेकर वन विभाग” तक प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके पास लंबे समय का प्रशासनिक अनुभव है, जिसे उन्होंने ग्राम विकास और शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग करने का निर्णय लिया।

शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत-सरपंच रमाकांत साहू:
रमाकांत साहू का मानना है कि शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत है, जो समाज और देश को आगे बढ़ा सकती है। अपने गांव के बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा और करियर के अवसर प्रदान करने के लिए उन्होंने यह पहल शुरू की। उनका उद्देश्य आगेसरा को शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श गांव बनाना है, जहां हर बच्चे को समान अवसर मिल सके। इस पहल के माध्यम से आगेसरा गांव आज डिजिटल इंडिया, नवाचार,और शिक्षा के समावेशी विकास की दिशा में सामाजिक समर्पण का प्रतीक बन चुका है।

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