सर्वांग सुंदर, अद्भुत और विलक्षण जीवन था श्रीकृष्ण का : बबीता दीदी
रिपोर्ट – अनमोल कुमार सुपौल
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिमरा
प्रवचन देते हुए बबीता दीदी ने कहा कि –
> “श्रीकृष्ण सर्वांग सुंदर, सर्वगुण संपन्न और 16 कलाओं से परिपूर्ण थे। उनकी सुंदरता और गुणों ने उन्हें ‘चितचोर’ बना दिया। कृष्ण शब्द का अर्थ ही सांवरिया है। उनका व्यक्तित्व हर किसी के मन को हर लेने वाला था। इसलिए जन्माष्टमी केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और आचरण सुधारने का अवसर है। बाहर रोशनी करना ही पर्याप्त नहीं, आत्मा रूपी दीपक को भी प्रज्वलित करना आवश्यक है।”
उन्होंने सभी से आहार, व्यवहार और विचार में शुद्धि लाने का आह्वान किया ताकि सच्ची जन्माष्टमी मनाई जा सके।
अतिथियों का उद्बोधन
मुख्य पार्षद यशोदा देवी ने कहा –
> “श्रीकृष्ण को याद करने के लिए हमें अपने कर्मों को सही करना होगा। दूसरों की बुराई, परचिंतन और परनिंदा से बचना चाहिए। हमें हंस की तरह गुण रूपी मोती चुनने वाले बनना है, तभी हम प्रभु प्रिय बन सकते हैं।”
विशिष्ट अतिथि और शिक्षक दिवाकर कुमार ने कहा –
> “कृष्ण की सुंदर झांकियों को देखने के लिए हमें अपनी दृष्टि को दिव्य बनाना होगा। यदि हम ज्ञान-योग और शुद्ध पुरुषार्थ को अपनाते हैं तो यह जन्माष्टमी हमारे लिए स्वर्गारोहण का सोपान बनेगी।”
आयोजन का संचालन
कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी ने किया। इस अवसर पर उपमुख्य पार्षद बिनीता देवी, टेकनिया वर्ल्ड के डायरेक्टर अतुल कुमार, शिक्षिका पूनम देवी, शिक्षक सौरभ कुमार, ब्रह्माकुमारी बीना कुमारी, सुमन कुमारी, पूजा कुमारी, डॉ. बिरेन्द्र प्रसाद साह, सत्यनारायण ठाकुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में श्रीकृष्ण-राधा की चैतन्य झांकी और भक्ति-संगीत ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।