* अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 : ‘दान से लाभ’ संदेश के साथ मनाया गया महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व…
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रम, सेमिनार, जागरूकता अभियान और सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर दिलाने के साथ-साथ समाज में समान अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना होता है।
उनका मानना है कि जब समाज महिलाओं के विकास के लिए सहयोग, संसाधन और अवसर प्रदान करता है, तो इसका लाभ केवल महिलाओं को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को मिलता है। इससे सामाजिक समरसता और समानता भी मजबूत होती है।
हर वर्ष निर्धारित की जाती है विशेष थीम
1908 में शुरू हुआ महिलाओं के अधिकारों का आंदोलन
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत वर्ष 1908 से मानी जाती है, जब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में करीब 15 हजार कामकाजी महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए जुलूस निकाला था। उन्होंने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और मतदान का अधिकार देने जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी। इस आंदोलन ने दुनिया के सामने महिलाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर किया।
1909 में पहली बार मनाया गया महिला दिवस
अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर 28 फरवरी 1909 को पहली बार महिला दिवस मनाया गया। इसके बाद वर्ष 1910 में कोपेनहेगन में आयोजित सोशलिस्ट इंटरनेशनल सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे व्यापक समर्थन मिला।
क्लारा जेटकिन ने दिया अंतरराष्ट्रीय स्वरूप का प्रस्ताव
इसके बाद वर्ष 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक मान्यता देते हुए इसे वैश्विक स्तर पर मनाना शुरू किया।
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक दिन नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समान अवसरों के लिए चल रही वैश्विक मुहिम का प्रतीक बन चुका है। यह दिन समाज को यह संदेश देता है कि महिलाओं को समान अवसर और सम्मान मिलने से ही एक मजबूत, समतामूलक और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।
