अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद UAE-ओमान समेत कई देशों ने ईरान की उड़ानों पर लगाई रोक, तेहरान से रोजाना करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होने का दावा
तेहरान(न्यूज़डेस्क)। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर अब हवाई सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी एयरलाइंस की उड़ानों को रोका गया, तो क्षेत्र में दूसरे देशों की उड़ानों को लेकर भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहम्मद मुखबर ने कहा है कि पश्चिम एशिया में हवाई सेवाएं सभी देशों के लिए खुली रहनी चाहिए। उनके बयान के मुताबिक, स्थिति ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें कुछ देशों की उड़ानों को अनुमति मिले और ईरानी विमानों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद कई देशों ने रोकी उड़ानें
यह मामला उस समय सामने आया जब अमेरिका ने 23 सितंबर को ईरान की सभी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान सहित कुछ देशों ने ईरान से जुड़ी हवाई सेवाओं पर रोक या प्रतिबंध लगाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान से रोजाना औसतन करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद अब तक कितनी उड़ानें सीधे प्रभावित हुई हैं, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है।
विदेशी कंपनियों पर भी अमेरिका की नजर
अमेरिका ने केवल ईरानी एयरलाइंस तक कार्रवाई सीमित रखने के संकेत नहीं दिए हैं। अमेरिकी पक्ष की ओर से विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी गई है कि यदि वे ईरानी विमानों को ईंधन, एयरपोर्ट सुविधाएं या टिकटिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, तो उन पर भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों की अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच प्रभावित होने का जोखिम बताया गया है।
अमेरिकी डॉलर सिस्टम का क्या मतलब है?
अमेरिकी प्रतिबंधों में डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली की बड़ी भूमिका है। किसी कंपनी पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में उसके लिए अमेरिकी बैंकों के माध्यम से डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भी अमेरिकी प्रतिबंध चिंता का विषय बन सकते हैं।
ईरान ने पड़ोसी देशों से क्या अपील की?
इससे पहले ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी पड़ोसी देशों से अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई देश ईरानी उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने के अमेरिकी कदम का समर्थन करता है, तो ईरान भी उसके साथ हवाई संपर्क को लेकर जवाबी कदम उठा सकता है।
क्या ईरान दूसरे देशों की उड़ानें रोक सकता है?
ईरान के पास किसी दूसरे देश के एयरपोर्ट को सीधे बंद करने का अधिकार नहीं है। इसी वजह से यह सवाल भी उठ रहा है कि ईरान अपनी चेतावनी को व्यवहार में किस तरह लागू कर सकता है। कुछ रिपोर्टों में ईरान की पूर्व सैन्य कार्रवाइयों का हवाला देते हुए बताया गया है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर हवाई यातायात पहले भी प्रभावित हुआ है।
पहले भी बंद हुआ था पश्चिम एशिया का एयरस्पेस
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के शुरुआती दौर में क्षेत्र के कई देशों को हवाई सुरक्षा से जुड़े कदम उठाने पड़े थे। रिपोर्टों के मुताबिक, कतर, सऊदी अरब, UAE, कुवैत, बहरीन, ओमान और जॉर्डन से जुड़े क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई थीं।
इसके बाद संबंधित देशों ने कुछ समय के लिए अपने एयरस्पेस के पूरे या कुछ हिस्से में उड़ानों पर प्रतिबंध लगाए थे। फिलहाल ईरान की ताजा चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में हवाई सेवाओं को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आगे प्रतिबंध बढ़ते हैं या उड़ानों के संचालन में बदलाव होता है, यह संबंधित देशों के फैसलों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा।
“यह खबर [दैनिक भास्कर] की रिपोर्ट पर आधारित है।”
