* 23 माह तक फाइलो में कैद रही HR पॉलिसी, अब सरकार ने दिए 15 दिन — यह कर्मचारियों का नहीं, सरकार की विश्वसनीयता का इम्तिहान है…
उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के साथ हुई चर्चा के बाद छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने कर्मचारियों के व्यापक हित को देखते हुए प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह सरकार पर विश्वास नहीं, बल्कि सरकार को अपने सार्वजनिक वचन को निभाने का अंतिम अवसर दिया गया है।प्रदेश के हजारों कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से ग्रामीण विकास की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं।
लेकिन विडंबना यह है कि जिन कर्मचारियों के भरोसे शासन की योजनाएं गांव-गांव तक पहुंचती हैं, उन्हीं कर्मचारियों को आज तक सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सेवा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि HR पॉलिसी बनाने के लिए गठित समिति 23 माह तक भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी।
यदि सरकार वास्तव में रामराज्य की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है, तो इसकी शुरुआत उन कर्मयोगियों के सम्मान और सुरक्षा से होनी चाहिए, जो पिछले दो दशकों से ग्रामीण विकास और रोजगार गारंटी व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
रामराज्य केवल नाम या नारा नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशीलता, जवाबदेही और श्रम के सम्मान का आदर्श है। ऐसे में सरकार से अपेक्षा है कि वह बिना किसी और विलंब के समस्त 12 हजार वीबी-जी राम जी (मनरेगा) कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन (HR) नीति लागू कर सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा नियमितीकरण की दिशा में ठोस निर्णय ले।