शशिकांत सनसनी, अंबागढ़-चौकी । छत्तीसगढ़ में फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में प्रवेश करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। कुल 9 लोगों पर आरोप है कि वे नकली नियुक्ति पत्र के जरिए सरकारी नौकरी कर रहे हैं, जिनमें से चार कर्मचारी मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षा विभाग के अंतर्गत पदस्थ हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सुखराम साहू ने रविवार को सुबह 11 बजे अंबागढ़ चौकी में आयोजित प्रेस वार्ता में किया। उन्होंने बताया कि इन सभी नौ व्यक्तियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासकीय सेवाओं में प्रवेश पाया है।
जिन लोगों पर आरोप लगे हैं:
1. डोलामनी मटारी,2. शादाब उस्मान,3. अजहर सिद्दीकी,4. आशुतोष कछवाहा,5. मोहम्मद अमीन शेख,6. फागेंद्र कुमार सिन्हा,7. टीकम चंद्र,8. रजिया अहमद,9. सी. एच. अन्थोनी अम्मा
इनमें से चार कर्मचारी वर्तमान में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 व डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि अन्य पांच कर्मचारी विभिन्न जिलों में पदस्थ हैं।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी फत्तेराम कोसरिया ने सोमवार शाम इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
> “हमें इस संबंध में जानकारी प्राप्त हुई है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपितों द्वारा प्रस्तुत नियुक्ति आदेशों की सत्यता संदेह के घेरे में है। संदेह है कि ये नियुक्ति पत्र नकली दस्तावेजों के माध्यम से तैयार किए गए, जिससे संबंधित व्यक्ति सरकारी सेवाओं में प्रवेश पा गए।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
जिला स्तर पर जांच समिति गठित किए जाने की संभावना है
दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए विभागीय रिकार्ड व मानव संसाधन मंत्रालय से तथ्य मिलान किया जा सकता है
दोषी पाए जाने पर न केवल सेवा समाप्ति बल्कि कानूनी कार्यवाही भी संभव है
इस खुलासे ने शासकीय भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला छत्तीसगढ़ में फर्जीवाड़े के ज़रिए सरकारी सेवा में प्रवेश का सबसे गंभीर उदाहरण बन सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी शीघ्रता और गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है।
यह मामला छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक संरचना में विश्वास बनाए रखने की एक बड़ी परीक्षा बनकर उभरा है।
